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गोरखपुर: दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन की यहां मौजूद है पूरी कहानी, जानिए क्या है इसकी अनोखी गाथा

Sun, 31 May 2020 08:29 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 31 May 2020 08:29 AM IST
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World longest platform gorakhpur station development special history story
gorakhpur rail musium - फोटो : Social media

विश्व के सबसे लंबे प्लेटफार्म (1366.44 मीटर) वाले स्टेशन गोरखपुर और रेलवे की विकास गाथा रेल म्यूजियम में मौजूद पुराने रेल इंजन और उपकरण आज भी बयां करते हैं। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने अपने ऐतिहासिक धरोहर को यहां सहेज कर रखा है। रेल म्यूजियम में रखे गए पुराने इंजन, उपकरण, मॉडल और अभिलेख रेलवे के प्रगति यात्रा की कहानी को बयां कर रहे हैं। यह म्यूजियम न सिर्फ शहर बल्कि पूर्वांचल और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

World longest platform gorakhpur station development special history story
gorakhpur rail musium - फोटो : Social media

गोल्फ ग्राउंड के सामने स्थित बंगला नंबर पांच में रेल म्यूजियम स्थापित है, जो पूर्वोत्तर रेलवे के सबसे पुराने बंगलों (लगभग 120 वर्ष पुराना) में से एक है। भवन का निर्माण 1890 और 1900 के बीच हुआ। भवन को बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से ईंट मंगाई गई थीं। म्यूजियम की नींव नौ अप्रैल, 2005 को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रखी थी।

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gorakhpur rail musium - फोटो : Social media

यहां मौजूद है पूर्वोत्तर रेलवे का पहला इंजन
रेल म्यूजियम में पूर्वोत्तर रेलवे का पहला इंजन लार्ड लारेंस को रखा गया है जो लोगों को आकर्षित करता है। इस इंजन का निर्माण लंदन में 1874 में डब्स कंपनी ने की थी। लंदन से इंजन को बड़ी नाव से कोलकाता तक लाया गया था। उत्तर बिहार में जबरदस्त अकाल के दौरान राहत पहुंचाने के लिए वाजितपुर से दरभंगा के बीच महज 60 दिनों में 51 किमी रेल लाइन बिछाई गई थी। उसी रेल लाइन पर लार्ड लारेंस इंजन 15 अप्रैल, 1874 को राहत सामग्री लेकर दरभंगा पहुंचा था। 

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gorakhpur rail musium - फोटो : Social media

इटली में बने स्टीम क्रेन को देखना रोमांचकारी है
20 टन क्षमता का ट्रेवलिंग स्टीम क्रेन को देखना काफी रोमांचकारी होता है। इस क्रेन का निर्माण इटली में हुआ था। ऑफिसियल मिकानिका ई फोंडी नावाल मिकानिका नेपल्स कंपनी ने वर्ष 1958 में इसका निर्माण किया था। इस प्रकार के क्रेनों का उपयोग रेलवे ट्रैक पर भारी सामानों को उठाने व ट्रैक अवरोधों को हटाने में होता था।

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gorakhpur rail musium - फोटो : Social media

ट्वाय ट्रेन और पैलेस ऑन व्हील का अलग है आनंद
रेल म्यूजियम में ट्वाय ट्रेन (बाल रेल गाड़ी) ब'चों को आकर्षित करती है। ट्रेन के लिए ट्रैक बिछाया गया है। इसके लिए अलग से प्लेटफार्म के साथ रास्ते में क्रासिंग और सुरंग भी बनाया गया है। इसके स्टेशन का नाम गोल्फ कोर्स है। जबकि पैलेस ऑन व्हील्स कोच और एसी हेरिटेज कोच रेस्टोरेंट ट्रेन में बैठकर नाश्ता और कॉफी पीने का अलग आनंद है।

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