उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं होली के मद्देनजर हर्बल गुलाल बना रही है। इस बार सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी समूहों के बनाए हर्बल गुलाल का प्रयोग करेंगे। इसके साथ में ही बाजारों में भी इसकी विक्री होगी। समूहों के जरिए निर्मित हर्बल गुलाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होगा।
यूपी: समूह की महिलाएं बना रही हर्बल गुलाल, सरकारी विभागों से मिल रहा आर्डर
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समूह की महिलाओं को कृषि से अतिरिक्त आजीविका के नित नए साधन तलाश कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का शासन का पूरा जोर है। यहीं वजह है कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन में जिला मिशन प्रबंधक और ब्लॉक मिशन प्रबंधकों की तैनाती भी हुई है। जिला मिशन प्रबंधक महजबीन खान यूटूब पर सी लर्निग एप के जरिए हर्बल गुलाल बनाने का तरीका जानी और समूहो को प्रेरित की। इधर होली का त्योहार नजदीक है। हर्बल गुलाल बनाने का काम पार्वती स्वयं सहायता समूह रामपुर और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह शिवसरा ने शुरू कर दिया। पार्वती स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष राधिका गुप्ता बताती है कि उनके पति पुनीत गुप्ता बरदहिया बाजार में गुमटी में पान की छोटी सी दुकान चलाते है। उनके पास दो बच्चे है। खर्च के हिसाब से पति की कमाई नहीं हो पाने से समस्या उत्पन्न हुई।
वर्ष 2019 में 15 महिलाओं को जोड़ कर वह समूह का गठन की। वैसे उनका समूह होजरी का काम करता है। बच्चों का ड्रेस बनाती है। इसके अलावा अन्य कपड़ों की सिंलाई करती है। जिला मिशन प्रबंधक महजबीन खान की प्रेरणा से वह हर्बल गुलाल बना रही है। हर्बल गुलाल बनाने में आरारोट, गुलाब, गेंदे और जासमीन के पत्ते को सुखा कर पाउडर तैयार करती है।
केवड़े का जल और खाने वाला सोड़ा प्रयोग करती है। प्रति किलोग्राम हर्बल गुलाल बनाने में 120 रूपये का खर्च आता है। उसे 150 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रही है। वैसे हर्बल गुलाल का प्रयोग करने से स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है। अभी तक दस किलोग्राम हर्बल गुलाल बना चुकी है। जिसका आर्डर सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिया है। दुकानदारों से भी संपर्क करके हर्बल गुलाल की विक्री करेंगी। उनके साथ समूह की 15 महिलाएं इस काम में जुड़ी है। इसी तरह लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं भी हर्बल गुलाल बना रही है।
परियोजना निदेशक डीआरडीए प्रमोद यादव ने कहा कि शासन का पूरा जोर है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। समूह की महिलाएं कोरोना संक्रमण काल में मास्क, सैनिटाइजर, पीपीई किट आदि बनाई और उसका उपयोग भी हो रहा है। इन्हें बैंक सखी, बिजली बिल जमा करने, बिजली मीटर की रीडिंग पता करने, कोटे की दुकान चलाने और पोषाहार वितरण का काम भी सौंपा गया है। दो समूहों ने हर्बल गुलाल बनाने का काम शुरू किया है। इन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकारी विभागों के अलावा बाजारों में इनके जरिए तैयार हर्बल गुलाल की विक्री कराने की व्यवस्था कराई जा रही है। नित नए आजीविका के साधन मुहैया करा कर समूह की महिलाओं का सशक्त बनाने की ओर कदम बढाया जा रहा है।