महराजगंज के तराई की माटी से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का गहरा नाता था। महराजगंज में जब बापू के चरण घुघली रेलवे स्टेशन पर पड़े थे, उस वक्त उनके स्वागत के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े थे।
2 of 5
MaharajGanj news
- फोटो : अमर उजाला।
तराई में अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए ट्रेन से बापू यहां आए थे। क्षेत्र में जनसभा कर बापू ने स्वाधीनता के आंदोलन का बिगुल बजाया था। 4 अक्तूबर 1929 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आने की सूचना मिली थी। उस समय संचार व्यवस्था बेहतर नहीं थी।
3 of 5
MaharajGanj news
- फोटो : अमर उजाला।
बावजूद इसके बापू के चाहने वाले सक्रिय थे। बापू को चाहने वाले छत्रधारी लाल, हौसला त्रिपाठी, दुर्योधन प्रसाद, नरसिंह ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों को बापू के आगमन की सूचना दी। लोगों को जैसे ही यह सूचना मिली। एक दूसरे को बताते हुए सभी घुघली रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़े। हर कोई बापू की एक झलक पाने को व्याकुल था। ट्रेन जैसे ही घुघली रेलवे स्टेशन पर रूकी जनसैलाब उमड़ पड़ा। बच्चे, बूढ़े, नौजवान सभी पहुंचे। भारत माता की जय से पूरा वातावरण गूंज उठा था।
4 of 5
महात्मा गांधी
- फोटो : फाइल फोटो
स्टेशन से जाने के बाद बापू ने बंदी ढाले एवं बैकुंठी घाट पर जनसभा की। इसके बाद 5 अक्तूबर 1929 को महराजगंज में अंग्रेजों भारत छोड़ों का नारा बुलंद हुआ। जवाहर लाल नेहरू पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. घनश्याम शर्मा कहते हैं कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस क्षेत्र में आकर अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजाया था। उनके आगमन का यादगार घुघली रेलवे स्टेशन बना।
5 of 5
MaharajGanj news
- फोटो : अमर उजाला।
वर्ष 1907 में बना था रेलवे स्टेशन
घुघली रेलवे स्टेशन की स्थापना वर्ष 1907 में हुई थी। क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा होने के कारण कोई सुविधा नहीं थी। जिससे यह स्टेशन यात्रियों के लिए वरदान साबित हुआ। अंग्रेजी हुकूमत के समय से लेकर अब तक तमाम यादों को यह रेलवे स्टेशन सहेजे हुए है। इसी रेलवे स्टेशन पर कोयले से चलने वाली रेलगाड़ी पर चढ़कर महात्मा गांधी आए थे। इन दिनों यह रेलवे स्टेशन आवागमन का लाइफ लाइन बन चुका है।