आरक्षण का गणित बदलते ही सैकड़ों की संख्या में प्रधानी के दावेदारों के तेवर भी बदल गए। कोई खामोशी से घर बैठ गया तो, जो दिल्ली-मुंबई से काम छोड़ किस्मत आजमाने गांव आए थे, वे लौटने लगे। अचानक कई पंचायतों में दावतों का दौर बंद हो गया। दावेदार से मोटे चंदे की आस में गांव-गांव हो रही खेल प्रतियोगिताएं भी कम हो गईं। कई दावेदार वोटरों को लुभाने में किए गए खर्च का हिसाब लगा रहे हैं। जनता को भनक लगी, तो कई के घर सुबह से जुटने वाली भीड़ अचानक लापता हो गई। वहीं, कुछ चुनाव में खुद को ताल ठोंक पाने से वंचित होता देख डमी प्रत्याशी की तलाश में जुट गए हैं। किसी ऐसे की तलाश की जा रही है, जिसकी उस बिरादरी में थोड़ी बहुत पहचान भी हो और जिस पर चुनाव में रुपये खर्च कर पांच साल तक के लिए उसकी निष्ठा व ईमानदारी पर दांव खेला जा सके।
यूपी पंचायत चुनाव: आरक्षण का गणित बदलते ही बदल गए दावेदार, दुआ-सलाम, दावतों का दौर भी बंद
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पंचायतों में प्रधान के आरक्षण की प्रक्रिया अभी चल रही है, मगर ज्यादातर ब्लाकों में तस्वीर तकरीबन साफ हो चुकी है। कोई न कोई जुगाड़ लगाकर गांव, किस वर्ग के लिए आरक्षित हो रहा है, कई दावेदारों ने इसकी जानकारी भी हासिल कर ली है। इसी के साथ गोरखपुर जिले की कई पंचायतों में प्रधानी की कुर्सी को लेकर पिछले साल से ही गरमाये माहौल का रुख बदलता जा रहा है। तमाम दावेदार निराश होकर बैठ गए, तो गांवों के मंदिरों, चबूतरों और चौराहों का माहौल अचानक बदल गया है। अब आरक्षण के मुताबिक नए दावेदार सामने आ रहे हैं। ऐसे में फिर से माहौल बनने में थोड़ा समय लगने की उम्मीद है।
बांसगांव ब्लाक की एक पंचायत के एक दावेदार का कहना है कि उन्होंने जो गणित बैठाया था उसके मुताबिक सीट अनारक्षित हो रही थी, मगर अब ओबीसी होती दिख रही है। कहते हैं कि पिछले छह महीने से व्यवसाय ठप कर चुनाव में कूद गए थे। अब तक तीन लाख से अधिक खर्च कर चुके, मगर सब बेकार हो गया।
आरक्षण बदलवाने की आस में लगा रहे चक्कर
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दावेदारी कर रहे कई दावेदारों का खेल आरक्षण के चलते बिगड़ने वाला है। लंबे समय से मतदाताओं को रिझाने के चक्कर में कई दावेदार, बड़ी पूंजी खर्च कर चुके हैं। अब आरक्षण के फेर में पूंजी डूबती लग रही, तो मन मुताबिक सीट तय कराने के लिए तमाम नेताओं, पंचायतीराज दफ्तरों से लेकर लखनऊ तक के चक्कर लगा रहे हैं। जिले स्तर पर चल रही आरक्षण प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए लोगों को उम्मीद बंधी हुई है कि कहीं से जुगाड़ लगाकर सीट मनमाफिक कराई जा सकती है। हालांकि किसी की दाल फिलहाल गल नहीं रही।