रामपुर जिले में मारा गया पशु तस्कर जुबैर उर्फ कालिया मामूली चोर था। धीरे-धीरे हिम्मत बढ़ी और पशु तस्करी के लिए यूपी से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक कुख्यात हो गया। अपराध की दुनिया में जुबैर उर्फ कालिया का नाम खौफ का पर्याय बन चुका था। छात्र दीपक की हत्या के बाद वह पुलिस के निशाने पर आया जुबैर रामपुर में मुठभेड़ में मारा गया।
वर्ष 2017 में जुबैर पर पहली बार रामपुर कोतवाली क्षेत्र में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत दो केस दर्ज हुए। इसके बाद वह अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। 2019 में उसने चोरी और चोरी की संपत्ति रखने का अपराध किया, जिसके चलते थाना पटवई, रामपुर में कई धाराओं में केस दर्ज हुआ।
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गोरखपुर छात्र हत्याकांड
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2020 में रामपुर जिले के मिलक और कैमरी थाना क्षेत्रों में चोरी, गौकशी और आर्म्स एक्ट के कई केस दर्ज हुए। हत्या, गौकशी, अवैध हथियार, चोरी, पशु क्रूरता और गैंगस्टर एक्ट समेत संगीन धाराओं में शामिल जुबैर के अपराध की फेहरिस्त लंबी है। विभिन्न जिलों में उसके खिलाफ 18 केस दर्ज थे।
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gorakhpur student murder
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इसी साल उस पर गैंगस्टर एक्ट का भी केस दर्ज हुआ। वर्ष 2022 में जुबैर की सक्रियता और बढ़ गई। रामपुर के गंज थाना क्षेत्र में सीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट से जुड़े तीन केस दर्ज हुए। इसके बाद वर्ष 2024 में उसका आपराधिक नेटवर्क बलरामपुर, गोंडा और गोरखपुर तक फैल गया। तुलसीपुर (बलरामपुर), सिकरीगंज (गोरखपुर) और मनकापुर (गोंडा) थाना क्षेत्रों में गौकशी, पशु क्रूरता समेत अन्य गंभीर धाराओं में तीन केस दर्ज किए गए।
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Gorakhpur Student murder
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2025 में गोरखपुर के पिपराइच थाने में गौकशी, हत्या समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ। इसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। एसटीएफ के साथ कई जिलों की पुलिस उसे पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही थी। जुबैर उर्फ कालिया लगातार छोटे अपराध करते हुए हत्या और संगठित अपराधों तक पहुंच गया।
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यूपी पुलिस ने किया जुबैर का एनकाउंटर
गोरखपुर में हुए बवाल के मामले में एक लाख रुपये का इनामी गो तस्कर पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। मुठभेड़ के दौरान फायरिंग में एक उप निरीक्षक समेत दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए जबकि दो गोलियां सीओ सिटी जितेंद्र सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगी हैं। वह बाल-बाल बच गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद डीआईजी मुनिराज जी समेत अन्य पुलिस व प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंच गए।