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उजड़ गया परिवार: एक साथ चार मासूमों सहित उठीं पांच अर्थियां तो रो पड़े लोग, बोले- भगवान किसी को ना दिखाए ऐसा दिन
Mon, 09 Aug 2021 01:51 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 09 Aug 2021 01:51 PM IST
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एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के दोहरीघाट कार हादसे में हुई पांच मौतों ने गोरखपुर जिले को हिला कर रख दिया है। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद जब पांचों शव गांव पहुंचे तो पूरे इलाके में मातम छा गया। चार मासूमों समेत पांच लोगों का शव देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
पलक झपकते ही सूना हो गया पतरू का आंगन... गांव में छाया मातम
पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां खत्म हो गईं। घर की बहू और चार मासूमों की मौत की खबर गांव में जिसने भी सुनी, आंखें डबडबा गईं। पट्टीदारी के लोग हादसे की खबर पाते ही मऊ रवाना हो गए। उधर, मासूम बच्चों के बाबा पतरू को अभी मौत की खबर नहीं दी गई है। वह छत्तीसगढ़ में ही रहते हैं।
पलक झपकते ही हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां खत्म हो गईं। घर की बहू और चार मासूमों की मौत की खबर गांव में जिसने भी सुनी, आंखें डबडबा गईं। पट्टीदारी के लोग हादसे की खबर पाते ही मऊ रवाना हो गए। उधर, मासूम बच्चों के बाबा पतरू को अभी मौत की खबर नहीं दी गई है। वह छत्तीसगढ़ में ही रहते हैं।
हादसे के बाद से गांव में मातम।
- फोटो : अमर उजाला।
घायल पिता को भी पत्नी और बच्चों की मौत की खबर से शाम तक अंजान रखा गया था। क्योंकि उनकी भी हालत नाजुक बनी हुई है। गांव के मुकेश विश्वकर्मा, शेषमणि जायसवाल, गौतम कन्नौजिया, मोहन कुमार का कहना है कि बच्चों से आस पड़ोस के लोगों का खास लगाव था। जब भी आते थे, खेलते-कूदते थे। अब ऐसा नहीं होगा। घर-आंगन सूना हो गया है।
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मृतकों की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
पिछले 20 वर्षों से रखते हैं ताजिया
ग्रामीणों के मुताबिक घायल महेश मोदनवाल के पिता पतरू पिछले 20 वर्षों से मोहर्रम का ताजिया रखते हैं। वह परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग हो गए तो परिजनों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। फुलवरिया गांव के शेषमणि जायसवाल, मोहन कुमार, कृष्णा मोदनवाल व गौतम कुमार ने बताया कि 20 वर्ष पहले पतरू सड़क हादसे में घायल हो गए। परिजनों से मन्नत मांगी और कहा कि पतरू के ठीक होने पर ताजिया रखेंगे। ठीक हुए तो ताजिया रखने का सिलसिला चल पड़ा। इस बार भी ताजिया रखने आ रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।
ग्रामीणों के मुताबिक घायल महेश मोदनवाल के पिता पतरू पिछले 20 वर्षों से मोहर्रम का ताजिया रखते हैं। वह परिवार के साथ छत्तीसगढ़ में रहते हैं। बुजुर्ग हो गए तो परिजनों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। फुलवरिया गांव के शेषमणि जायसवाल, मोहन कुमार, कृष्णा मोदनवाल व गौतम कुमार ने बताया कि 20 वर्ष पहले पतरू सड़क हादसे में घायल हो गए। परिजनों से मन्नत मांगी और कहा कि पतरू के ठीक होने पर ताजिया रखेंगे। ठीक हुए तो ताजिया रखने का सिलसिला चल पड़ा। इस बार भी ताजिया रखने आ रहे थे। इसी बीच हादसा हो गया।
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एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत।
- फोटो : अमर उजाला।
मुक्तिपथ पर एक साथ जलीं एक ही परिवार की पांच चिताएं
मऊ में हादसा होने की वजह से वहीं पर पोस्टमार्टम भी कराया गया। परिवार के लोग हादसे की खबर पाते ही रविवार सुबह रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद रविवार रात शवों को बड़हलगंज में सरयू तट पर स्थित मुक्तिपथ लाया गया। यहां एक ही परिवार की पांच चिताएं एक साथ जलीं तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। श्मशान घाट पर परिवार वालों का बिलखना देख कर लोगों ने कहा कि भगवान ऐसा दिन किसी को ना दिखाए। मुखाग्नि महेश मोदनवाल ने दी।
मऊ में हादसा होने की वजह से वहीं पर पोस्टमार्टम भी कराया गया। परिवार के लोग हादसे की खबर पाते ही रविवार सुबह रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद रविवार रात शवों को बड़हलगंज में सरयू तट पर स्थित मुक्तिपथ लाया गया। यहां एक ही परिवार की पांच चिताएं एक साथ जलीं तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। श्मशान घाट पर परिवार वालों का बिलखना देख कर लोगों ने कहा कि भगवान ऐसा दिन किसी को ना दिखाए। मुखाग्नि महेश मोदनवाल ने दी।