फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

हाथी के हिंसक होने का मामला: गजराज के पालक को बचाने के लिए ओढ़ ली गई खामोशी की चादर

Sat, 18 Feb 2023 01:59 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 18 Feb 2023 01:59 PM IST
विज्ञापन
three people killed Case of elephant becoming violent
गोरखपुर में हाथी का तांडव। - फोटो : अमर उजाला।

हाथी के हिंसक होने और तीन लोगों की जान लेने के मामले में वन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस और महायज्ञ के आयोजक सवालों के घेरे में हैं। चारों में से कोई भी कानूनी कार्रवाई के लिए इच्छुक क्यों नहीं है? यही नहीं, कोई यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि हाथी का पालक कौन है? क्या हाथी को वैधानिक तरीके से पाला गया है? सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या हाथी के पालक को बचाने के लिए खामोशी की चादर ओढ़ी जा रही है?



 

three people killed Case of elephant becoming violent
गोरखपुर में हाथी का तांडव। - फोटो : अमर उजाला।

वन विभाग के डीएफओ विकास यादव का कहना है कि जब हाथी हिंसक हुआ था तो उसके महावत की मदद से उसे नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। इसका मतलब है डीएफओ मान रहे हैं कि हाथी पालतू है। हाथी किसका है यह तो महावत को भी मालूम है, फिर विभाग यह क्यों नहीं पता कर पा रहा है कि हाथी किसका है? वन विभाग बृहस्पतिवार के हादसे के संबंध में बिना शिकायत कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, तो इस पर तो कर ही सकता है कि बिना उसके लाइसेंस दिए और पंजीकरण कराए किसी ने जंगली जानवर को न केवल पाल रखा है, बल्कि उसे सार्वजनिक समारोहों में भी शामिल कर रहा है।

 

three people killed Case of elephant becoming violent
गोरखपुर में हाथी का तांडव। - फोटो : अमर उजाला।
पुलिस कह रही है कि शिकायत मिलने पर जांच करके कार्रवाई करेगी। उधर, परिजन शिकायत करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या हादसा नहीं हुआ? क्या हाथी ने तीन लोगों को नहीं मारा है? क्या पुलिस को खुद ही संज्ञान नहीं लेना चाहिए? जाहिर है कि पुलिस को खुद संज्ञान लेकर मामले की जांच करनी चाहिए और जो भी कानून के दायरे में आए उस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

जिला प्रशासन भी खामोश है, जबकि उसके जिले में एक जानवर ने तीन लोगों की जान ले ली है। जानवर किसका है? उसे क्यों पाला गया? उसे सार्वजनिक समारोह में क्यों शामिल किया गया? यह सब जानना प्रशासन का काम है। प्रशासन की खामोशी चौंकाने वाली है और संदेह पैदा करती है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
three people killed Case of elephant becoming violent
गोरखपुर में हाथी का तांडव। - फोटो : अमर उजाला।
इसी तरह, महायज्ञ के आयोजकों का भी रवैया उचित नहीं लग रहा है। उन्होंने कलशयात्रा में शामिल करने के लिए हाथी किसी से तय करके ही लाया होगा? जाहिर है कि उन्हें मालूम है कि हाथी पालतू है और उसे किसने पाला है। फिर भी हाथी के पालक का नाम बताने के लिए वह तैयार नहीं हैं। हो सकता है कि उन पर किसी का दबाव हो, लेकिन संबंधित विभागों को तो इसकी जांच करनी चाहिए। जब हाथी का महावत है तो हाथी किसी न किसी का पालतू तो है ही।



 
विज्ञापन
three people killed Case of elephant becoming violent
गोरखपुर में हाथी का तांडव। - फोटो : अमर उजाला।

यही नहीं यह कहा जा रहा है कि इसी हाथी ने साल 2020 में अपने महावत को मार डाला था। क्या इस बात से यज्ञ के आयोजन अंजान थे? यदि जानते थे तो ऐसे खतरनाक जानवर को इतने लोगों के बीच लाने का फैसला कैसे कर लिया गया? शायद सभी हाथी के पालक को जानते हैं, लेकिन उसे बचाने के लिए नाम नहीं लेना चाहते हैं। यही नहीं हाथी के पालक को बचाने में सभी खुद को भी बचा रहे हैं, क्योंकि यदि मामले की जांच होगी तो आंच सब पर आ सकती है।




 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed