कोरोना संकट के बीच पढ़ाई एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। स्कूल-कॉलेज बंद हो गए, ऑनलाइन क्लास की आदत नहीं थी, लेकिन इस चुनौती को शिक्षक और विद्यार्थियों ने अवसर के रूप में लिया। प्राथमिक स्तर पर बच्चों को ई-क्लास से जोड़कर समझाना आसान न था, लेकिन शिक्षकों ने विपरीत हालात में बच्चों को तराशने की कोशिश की। अमर उजाला ने गोरखपुर जिले के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षक और प्राचार्य से बात की। सभी का मानना है कि हालात सामान्य होने पर भी ऑनलाइन शिक्षा देने का महत्व कम न होगा, क्योंकि समय की घड़ी और तकनीक उल्टी दिशा में नहीं चलते।
Teachers' Day 2020: चुनौतियों से लड़कर ऑनलाइन पढ़ाई को बनाया विकल्प, शिक्षकों ने की बच्चों को तराशने की कोशिश
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तकनीक और ऑनलाइन युक्त ही होगी शिक्षा
गोविवि ई-पाठशाला समन्वयक प्रो. हर्ष सिन्हा ने बताया कि देश में ऑनलाइन शिक्षण वर्षों से चल रहा था। अप्रैल 2020 से इसने बड़ा धरातल ग्रहण किया। सभी शिक्षकों को इस विधि से अध्यापन करना पड़ा। सीमाएं और तकनीकी बाधाएं तो थीं पर मनोयोग व परिश्रम से कार्य किया। वेबिनार और ई-कंटेंट पर काम करते हुए शिक्षकों ने बहुत कुछ सीखा। समय की घड़ी व तकनीक कभी उल्टी दिशा में नहीं चलती है। हालात सामान्य होने पर भी ऑनलाइन शिक्षा का महत्व कम न होगा। नई शिक्षा नीति के दस्तावेज में भी इस बात के स्पष्ट संकेत हैं।
ऑनलाइन क्लास हमेशा, अब विकल्प बना रहेगा
डीवीएन पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि लॉकडाउन ने हमें ऑनलाइन शिक्षा के रुप में एक बेहतर विकल्प दिया है। इसे अपनाने में दिक्कतें तो आईं लेकिन शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विपरीत हालात में भी खुद को इसके लिए तैयार किया। ऑनलाइन पढ़ाई में भी बहुत सारी चुनौतियां सामने आई हैं। मसलन, नेटवर्क एक बड़ी समस्या है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के बहुत सारे विद्यार्थी एंड्रायड मोबाइल से अभी दूर हैं। हालात जब भी सामान्य होंगे, ऑफलाइन पढ़ाई तो होगी ही लेकिन ऑनलाइन इसमें बहुत मददगार साबित होगा। अपरिहार्य कारणों से जब भी कॉलेज बंद होते हैं उस वक्त ऑनलाइन क्लास ही विकल्प होंगे।
ऑनलाइन शिक्षा है एक बेहतर विकल्प
दयानंद इंटर कॉलेज खोराबार के अध्यापक राम प्रताप सिंह ने बताया कि कोविड-19 ने अचानक अपने पांव पसारने शुरू किए। बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो इसे लेकर सरकार ने ऑनलाइन क्लास को क्लास रूम टीचिंग के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कराने का निर्देश दिया। अमल भी शुरू हुआ मगर कई शिक्षक, अभिभावक या बच्चे तकनीकी रूप से दक्ष न होने की वजह से इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर के पास तो संसाधन तक नहीं हैं। बड़े बच्चों तक तो फिर भी यह कारगर साबित हुई है, मगर छोटे बच्चों को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है।
ऑनलाइन क्लास के लिए तैयार
राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज की सहायक अध्यापिका नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि 15 साल से अध्यापन कर रही हूं। ऑनलाइन क्लास के लिए खुद को तैयार करना एक चुनौती थी, मगर इसे स्वीकार किया। माध्यमिक शिक्षा विभाग की पहल पर बच्चों के लिए वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। उनमें विज्ञान विषय से संबंधित मेरे एक वीडियो का प्रसारण दूरदर्शन पर हुआ है। वीडियो की खासियत यह है कि बच्चे इसे जितनी बार चाहें, देख सकते हैं। इसके साथ ही सप्ताह में तीन दिन जूम एप के माध्यम से बच्चों को वीडियो से जुड़े लिंक साझा किए जाते हैं। अगर वो कोई सवाल जवाब करना चाहते हैं या उनकी कोई दुविधा है तो उसका निदान भी कराया जाता है। ऑनलाइन शिक्षा बदलते वक्त की मांग है। निश्चित रूप से इसकी पहुंच सभी बच्चों तक नहीं है। ऑनलाइन शिक्षा भविष्य में अध्यापन कार्य में आने वाले क्रांतिकारी बदलाव की नींव रख चुकी है।