उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के संजय कुमार उन चुनिंदा लोगों में हैं जो अपने शौक को ही रोजगार और आय का जरिया बनाने में कामयाब हुए हैं। यही वजह है कि 33 वर्षों से पारिजात नर्सरी का संचालन कर रहे संजय का पेड़-पौधों के प्रति प्रेम दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है।
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33 वर्षों से पारिजात नर्सरी चला रहे हैं संजय कुमार।
- फोटो : अमर उजाला।
संजय के शौक को बचपन में ही पिता मक्खन लाल निषाद ने पहचाना और प्रेरित किया। 1987 में उनके पिता ने ही मोहद्दीपुर में पारिजात नर्सरी की नींव रखी। सेंट एंड्रयूज कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद संजय पूरी तरह से नर्सरी को आगे बढ़ाने में लग गए।
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संजय कुमार ने विभिन्न प्रजातियों का संग्रह नर्सरी में तैयार किया है।
- फोटो : अमर उजाला।
33 वर्ष के सफर में करीब 20 हजार स्क्वायर फीट में संजय ने औषधीय, सजावटी पौधों के साथ ही रूद्राक्ष, कुमकुम, चंदन, हींग, पनियाला, सेब, किन्नू, आम की विभिन्न प्रजातियों का संग्रह नर्सरी में तैयार किया है। देश के अन्य शहरों से भी उन्नत किस्म की प्रजातियां नर्सरी में मंगाई जाती हैं।
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नर्सरी में मिल जाएंगे कई दुर्लभ औषधीय पौधे।
- फोटो : अमर उजाला।
संजय की नर्सरी में मौजूद औषधीय पौधों में कालमेघ, लेमन ग्रास, अश्वगंधा, ब्राम्ही, सर्पगंधा, कालमेघ, पारिजात, निर्गुंडी, हड़जोड़, सतावरी आदि हैं। इन्हें तैयार करने के लिए वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है।
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छत, दीवार और बेडरूम में भी लगा रहे पौधे।
- फोटो : अमर उजाला।
संजय ने बताया कि गोरखपुर के लोगों में बागवानी का क्रेज बढ़ा है। अब छत, बालकनी, बरामदा, दीवार, घर के अंदर सजावटी गमलों आदि में पौधरोपण किया जा रहा है। घर के भीतर लोग एरेका पाम, बैंबू पाम, पीस लीली, स्पाइडर प्लांट, मनीप्लांट, स्नेकप्लांट, फर्न लकी बैम्ड, जेड प्लांट आदि लगा रहे हैं।