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इस घाट पर हुआ था स्वतंत्रता सेनानी बिस्मिल का अंतिम संस्कार, जानिए कैसे बदल गई इसकी तस्वीर

Sat, 12 Dec 2020 02:58 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 12 Dec 2020 02:58 PM IST
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story of Pandit Ram Prasad Bismil of freedom fighter cremated at Rajghat in Gorakhpur
गोरखपुर राजघाट।(इनसेट में स्वतंत्रता सेनानी की फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के राप्ती नदी के तट पर स्थित राजघाट अंत्येष्टि स्थल की खासियत के बारे में बताने जा रहे हैं। आज जिस राजघाट अंत्येष्टि स्थल को आकर्षक रूप दिया जा रहा है उस स्थान पर आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का अंतिम संस्कार हुआ था। बता दें कि योगी आदित्यनाथ सांसद रहते राप्ती तट पर एक सुंदर घाट बनवाने का प्रयास कर रहे थे। जब वे मुख्यमंत्री बने तो इस कार्य की शुरूआत हुई। इसे रामघाट नाम दिया गया है। कोरोना संकट और बाढ़ की वजह से निर्माण की गति में बाधा आ गई। नए साल में इसका निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए पूरी कहानी...

story of Pandit Ram Prasad Bismil of freedom fighter cremated at Rajghat in Gorakhpur
राम प्रसाद बिस्मिल को इसी जगह दी गई थी फांसी। - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में जब स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई थी, तो इस समाचार को सुनने के बाद काफी संख्या में लोग जेल के गेट पर इकट्ठा हो गए थे। जेल का मुख्य द्वार बंद ही रखा गया और फांसीघर के सामने वाली दीवार को तोड़कर बिस्मिल का शव उनके परिजनों को सौंपा गया था।
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निर्माणाधीन राजघाट। - फोटो : अमर उजाला।
20 दिसंबर को लाखों लोगों ने जुलूस निकाल कर पूरे शहर में घुमाते हुए राप्ती नदी के किनारे राजघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इसके पहले घंटाघर के पास उनका पार्थिव शरीर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इसी वजह से गुरुकृपा संस्थान के संयोजक बृजेश कुमार त्रिपाठी पिछले कई वर्षों से राजघाट पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की याद में स्मृति स्थल बनवाने की मांग कर रहे हैं।
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राम प्रसाद बिस्मिल।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
फांसी के एक दिन पहले बिस्मिल से कराई गई थी उनकी माता- पिता से मुलाकात
19 दिसंबर को पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई थी। उसके एक दिन पहले उनकी मुलाकात उनके माता-पिता से कराई गई थी। 18 दिसंबर 1927 को माता-पिता से अंतिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसंबर 1927 (पौष कृष्ण एकादशी विक्रमी सम्वत् 1984) को प्रात:काल 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फांसी दे दी गई थी। इसके पहले 16 दिसंबर 1927 को बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय पूरा करके जेल से बाहर भिजवा दिया था।
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इस जेल में दी गई थी राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी - फोटो : अमर उजाला
बाबा राघव दास ने बरहज में बनवाया है बिस्मिल स्मृति स्थल
बिस्मिल की अंत्येष्टि के बाद बाबा राघव दास ने देवरिया जिले के बरहज नामक स्थान पर ताम्रपात्र में उनकी अस्थियों को संचित कर एक चबूतरा जैसा स्मृति-स्थल बनवा दिया।
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