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अगरबत्ती उद्योग लगाकर 'आत्मनिर्भर' बना ये शख्स, 20 और को दे रहा रोजगार

Fri, 12 Feb 2021 05:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Feb 2021 05:06 PM IST
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special success story of hardworking man made self-sufficient by making Incense Sticks Industry
अगरबत्ती उद्योग। - फोटो : अमर उजाला।

कोरोना काल में जहां नौकरियों पर संकट बना है। फैक्ट्रियां अभी पूरी क्षमता के साथ नहीं चल पा रही हैं। ऐसे में गोरखपुर जिले के सहजनवां के ओम पांडेय ने अगरबत्ती उद्योग के क्षेत्र में स्वरोजगार को अपना करियर बनाया है। खलीलाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में अगरबत्ती उद्योग को स्थापित कर न सिर्फ लाखों का कारोबार कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह की करीब 20 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

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ओम पांडेय - फोटो : अमर उजाला।

दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और फिर एमबीए मार्केटिंग एंड फाइनांस की डिग्री हासिल करने के बाद ओम ने भारत सरकार की आत्मनिर्भर मिशन के तहत अगरबत्ती की फैक्ट्री लगाने की योजना बनाई। उन्होंने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत उद्योग स्थापित करने के लिए ऋण के लिए आवेदन दिया।

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अगरबत्ती बनाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

15 लाख रुपये लोन स्वीकृत होने के बाद उन्होंने खलीलाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में अगरबत्ती की पहली फैक्ट्री स्थापित की। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लोन की राशि का 15 प्रतिशत की राशि सब्सिडी के रूप में मिली।

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अगरबत्ती बनाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।

वियतनाम से मंगाई चार अत्याधुनिक मशीनें
ओम पांडेय ने बताया कि आज के समय में किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर है तभी बाजार में पकड़ मजबूत कर सकती है। ऐसे में उन्होंने अगरबत्ती उद्योग के रूप में स्थापित देश वियतनाम की टेक्नोलॉजी अपनाने का विचार किया। वहां से चार मशीनें मंगवाई। इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री लगाकर खलीलाबाद के बरहीपार पैठान गांव की स्वयं सहायता समूह शीतला के साथ मिलकर अगरबत्ती का उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे कुल 13 महिलाएं जुड़ी हैं। उन्हें बांस की तिली और अगरबत्ती का कच्चा माल दे दिया जाता है। इन्हें तैयार कर हरेक महिला रोजाना 150-200 रुपये कमा ले रही हैं। वहीं छह-सात और लोग मार्केटिंग से जुड़े हैं।

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अगरबत्ती बनाती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला।
अगरबत्ती उद्योग में हैं काफी संभावनाएं
भारत में वर्तमान अगरबत्ती की खपत 1490 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। जबकि अगरबत्ती का उत्पादन प्रतिदिन मात्र 760 मीट्रिक टन है। वियतनाम और चीन से आयात के माध्यम से देश में अगरबत्ती की मांग को पूरा किया जाता है। गोरखपुर समेत आसपास के जिलों में भी काफी माल इन्हीं देशों से आता है। ऐसे में इस उद्योग की यहां काफी बेहतर संभावनाएं हैं।
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