{"_id":"6aecf2e3429bad709a095de3","slug":"gorakhpur-university-secure-grants-link-research-with-self-employment-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1509992-2026-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर विश्वविद्यालय : अनुदान जुटाएं, शोध को स्वरोजगार से जोड़ें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर विश्वविद्यालय : अनुदान जुटाएं, शोध को स्वरोजगार से जोड़ें
Fri, 06 Nov 2026 02:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 06 Nov 2026 02:49 AM IST
विज्ञापन
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने वनस्पति विज्ञान विभाग का किया निरीक्षण
विभाग की उपलब्धियों और चुनौतियों पर हुआ मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने वनस्पति विज्ञान विभाग का निरीक्षण कर शोध, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने अधिक शोध अनुदान जुटाने और शोध को स्वरोजगार से जोड़ने की सलाह दी।
कुलपति ने उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुसंधान अवसंरचना सुधार योजना के तहत अधिकाधिक अनुदान प्राप्त करने और प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शोध को केवल प्रकाशनों तक सीमित न रखकर नए उद्यमों, उद्योगों के सहयोग और नए उत्पादों के विकास से जोड़ना होगा।
शोध के परिणाम समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी होने चाहिए। उन्होंने विभाग की खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण कर भविष्य की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर उन्होंने शोधार्थियों से संवाद किया और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष प्रो. रामवंत गुप्ता ने बताया कि विभाग में करीब दो करोड़ रुपये की लागत के 12 शोध प्रोजेक्ट संचालित हैं। तीन वर्षों में 200 शोध पत्र प्रकाशित हुए, जबकि दो वर्षों में 13 पेटेंट और नौ प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त हुए हैं। इस दौरान प्रो. अजय सिंह, प्रो. गोपाल प्रसाद सहित विभाग के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
विभाग की उपलब्धियों और चुनौतियों पर हुआ मंथन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह ने वनस्पति विज्ञान विभाग का निरीक्षण कर शोध, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने अधिक शोध अनुदान जुटाने और शोध को स्वरोजगार से जोड़ने की सलाह दी।
कुलपति ने उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुसंधान अवसंरचना सुधार योजना के तहत अधिकाधिक अनुदान प्राप्त करने और प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शोध को केवल प्रकाशनों तक सीमित न रखकर नए उद्यमों, उद्योगों के सहयोग और नए उत्पादों के विकास से जोड़ना होगा।
विज्ञापन
शोध के परिणाम समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोगी होने चाहिए। उन्होंने विभाग की खूबियों, कमजोरियों, अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण कर भविष्य की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। प्रयोगशालाओं का निरीक्षण कर उन्होंने शोधार्थियों से संवाद किया और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रेरित किया।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष प्रो. रामवंत गुप्ता ने बताया कि विभाग में करीब दो करोड़ रुपये की लागत के 12 शोध प्रोजेक्ट संचालित हैं। तीन वर्षों में 200 शोध पत्र प्रकाशित हुए, जबकि दो वर्षों में 13 पेटेंट और नौ प्रतिलिपि अधिकार प्राप्त हुए हैं। इस दौरान प्रो. अजय सिंह, प्रो. गोपाल प्रसाद सहित विभाग के शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे।