ग्रह और नक्षत्रों की दुनिया सिर्फ सौर मंडल में ही नहीं बल्कि धरती पर भी है। हम बात कर रहे हैं नक्षत्रशालाओं की जहां ग्रह-नक्षत्रों के अद्भुत संसार को देख लोग रोमांचित हो उठते हैं। यहां पहुंच बच्चे शो के माध्यम से ब्रह्मांड से जुड़ी अपनी सभी जिज्ञासाओं को शांत कर लेते हैं। वहीं ग्रह-नक्षत्रों से जुड़े सवालों के जवाब उन्हें विशेषज्ञों से मिल जाते हैं। प्रदेश में सिर्फ तीन नक्षत्रशालाएं हैं। इसमें से एक गोरखपुर में भी है। जिसे लोग वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के नाम से जानते हैं। इसे लोग तारामंडल के नाम से भी जानते हैं। पूरे पूर्वांचल में यह एक मात्र नक्षत्रशाला है। इसके अलावा सिर्फ लखनऊ और रामपुर में नक्षत्रशालाएं हैं। वहीं प्रयागराज में भी एक नक्षत्रशाला है लेकिन उसे एक प्राइवेट संस्था संचालित करती है।
गोरखपुर में है ग्रहों और नक्षत्रों का एक अद्भुत संसार, जहां आकर रोमांचित हो जाते हैं लोग
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ऐसे हुई नक्षत्रशाला की शुरूआत
रामगढ़ताल के रूप में पूर्वांचल को प्रकृति की अनमोल धरोहर मिली हुई है। नब्बे के दशक में पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने यहां रामगढ़ताल परियोजना शुरू की। जिसके अंर्तगत नक्षत्रशाला बनाने की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद को सौंपी गई। परिषद ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण ‘जीडीए’ को कार्यदायी संस्था बनाया। तमाम दिक्कतों को पार करते हुए 2005 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ। 23 जनवरी 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने नक्षत्रशाला का लोकार्पण किया। अप्रैल 2006 में जीडीए ने नक्षत्रशाला का संचालन बंद कर दिया। उसके बाद संचालन की जिम्मेदारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद को सौंप दी गई। परिषद ने 21 सितंबर 2009 को इसका फिर से संचालन शुरू किया। तभी से नक्षत्रशाला निरंतर पूर्वांचल के लोगों को नक्षत्रों की दुनिया दिखा रहा है। यहां एक साथ तीन सौ लोग बैठकर नक्षत्रों की दुनिया देख सकते हैं।
नक्षत्रशाला में है एस्ट्रोनॉमी गैलरी
नक्षत्रशाला परिसर में एस्ट्रोनॉमी गैलरी भी है। इस गैलरी में खगोल विज्ञान के विकास यात्रा को इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों के माध्यम से जीवंत रूप से दिखाया जाता है। ग्रहों पर वजन बताने वाली मशीन लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र होती है।
खगोलीय घटनाओं का भी कराते हैं दर्शन
सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, आकाशीय पिंडो सहित तमाम तरह की खगोलीय घटनाओं को नक्षत्रशाला में टेलीस्कोप के माध्यम से लोगों को दिखाया जाता है। इसे देखने के लिए यहां लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग खगोलीय घटनाओं को करीब से देख खूब रोमांचित होते हैं।
45-45 मिनट के चलते हैं तीन शो
तारामंडल में तारों की दुनिया दिखाने के लिए तीन शो चलाया जाता है। इसकी शुरुआत दोपहर एक बजे होती है। दूसरों शो तीन बजे और तीसरा व अंतिम को शाम पांच बजे दिखाया जाता है। प्रत्येक शो को 45 मिनट का होता है। सोमवार को शो का संचालन नहीं किया जाता है।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के शो के टिकट ऑनलाइन बुक किए जा सकते हैं इसके साथ ही परिसर में मौजूद काउंटर से भी शो के टिकट खरीदे जा सकते हैं। यहां एक टिकट का दाम 25 रुपये है। स्कूल से आने वाले बच्चों के समूह को 10 रुपये प्रति टिकट के दर पर शो दिखाया जाता है।
साल में पहुंचते हैं दो लाख दर्शक
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में साल में दो लाख से अधिक दर्शक ग्रह-नक्षत्रों के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। इससे नक्षत्रशाला को प्रतिवर्ष 19 लाख रुपये की वार्षिक आय होती है।