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प्रकृति की गोद में स्थित है 'त्रिवेणी धाम', नेपाल की गरिमा को दर्शाता है ये मंदिर, तस्वीरें

Fri, 19 Jun 2020 03:46 PM IST
vivek shukla धर्मेंद्र कुमार गुप्त, निचलौल।
धर्मेंद्र कुमार गुप्त, निचलौल। Published by: vivek shukla Updated Fri, 19 Jun 2020 03:46 PM IST
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Special story of Triveni Dham in nichlaul Maharajganj
triveni dham - फोटो : अमर उजाला।

नेपाल राष्ट्र के नवलपरासी जिले से गुजरी नारायणी नदी के तट पर बसा त्रिवेणी धाम तीर्थयात्रियों के आस्था का अटूट केंद्र है। त्रिवेणी धाम में भारत के अनेक राज्यों सहित नेपाल राष्ट्र के भी तीर्थयात्री आते हैं। पहाड़ियों और उबड़ खाबड़ मैदानी इलाकों से तीर्थयात्रियों व प्रकृति प्रेमियों की नजर जहां तक जाती है, उन्हें विशाल पर्वत और घने जंगलों के बीच देवी देवताओं के मंदिर ही नजर आते हैं।



 

Special story of Triveni Dham in nichlaul Maharajganj
triveni dham - फोटो : अमर उजाला।

वहीं पहाड़ों की चोटियों से इनके बीच में कई झरने हैं। यहां साधु, संत व तीर्थयात्रियों के अलावा बौद्ध धर्म के लोग भी जुटते हैं। लेकिन इस वर्ष पहले तो कोरोना संक्रमण के वजह से सीमा सील है। वहीं नेपाल सरकार द्वारा देश का नया नक्शा जारी करने से लोग असमंजस में है। इन दिनों लोगों की भीड़ नहीं दिखती है।

Special story of Triveni Dham in nichlaul Maharajganj
triveni dham - फोटो : अमर उजाला।

त्रिवेणी धाम स्थित पटेल मंदिर के पुजारी रामदास बताते हैं कि त्रिवेणी धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गजेंद्र मोक्ष, गज ग्राह, महर्षि वाल्मीकि आश्रम, शीशमहल, नर देवी स्थल, शिव-पार्वती समेत कई देवी-देवताओं का मंदिर है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल समेत बिहार व नेपाल राष्ट्र के लोग हर वर्ष सावन के पवित्र माह व अन्य त्योहारों पर त्रिवेणी धाम में आते हैं। लेकिन इस वर्ष त्रिवेणी यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वजह है, दुनिया भर में कोरोना संक्रमण का प्रसार एवं नेपाल राष्ट्र द्वारा देश का नया नक्शा जारी करना।

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Special story of Triveni Dham in nichlaul Maharajganj
triveni dham - फोटो : अमर उजाला।

गजेंद्र मोक्ष मंदिर नेपाल की धार्मिक संपदा की गरिमा को दर्शाता
गजेंद्र मोक्ष मंदिर के उत्तराधिकारी स्वामी श्रीकृष्ण ने बताया कि नेपाली पैगोडा शैली, दैविक संपदापन्न दक्षिणात्य शैली एवं वास्तु शास्त्रीय विधान के अनुसार पंचमहाभूता पंजीकरण पद्धति से निर्मित ब्रह्माण्ड का प्रतीकात्मक स्वरूप दर्शाते हुए पांच मंजिल में निर्मित यह मंदिर नेपाल की धार्मिक संपदा की गरिमा को दर्शाता है। मंदिर के बाहर भगवान का रथ खींचते हुए हाथी दिखते हैं।

मंदिर के अंदर श्री तिरुपति बालाजी में विराजमान श्री वेंकटेश भगवान, श्री राधाकृष्ण जी के विभिन्न झांकियां, अष्टलक्ष्मी, वाल्मीकि आश्रम, जनकपुर धाम, अयोध्या में श्री राम दरबार, मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह आदि दस अवतारों का दर्शन, सुरक्षा मुद्रा में हनुमान जी के साथ गरूड़ जी, वैदिक शास्त्रीय संगीत श्रवण कराते हुए अपने मित्र तम्बुरूजी के साथ देवर्षि नारद, श्री मुक्ति नाथ श्रेत्र में दीर्घकाल तक तपस्या कर भगवान का साक्षात्कार करने वाले महर्षि शालंकायन, विष्णुचित शूरी, परकाल शूरी एवं श्रीवैष्णव परंपरा के आल्वार आचार्य के साथ भगवान श्री गजेंद्र मोक्ष नारायण का भी दर्शन होता है।
 

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Special story of Triveni Dham in nichlaul Maharajganj
triveni dham - फोटो : अमर उजाला।

तपस्थली है संगम तट
रामायण के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की तपस्थली भी नारायणी के संगम तट पर ही स्थित है। कहते हैं कि अयोध्या से सीता के निर्वासन के बाद शरणस्थली भी यही है। जहां पर लव कुश का जन्म और लालन पालन के साथ शिक्षा भी मिली थी।

नारायण के नाम पर पड़ा है नारायणी नदी का नाम
नारायणी वह नदी है, जिसमें छीर सागर से निकलने के बाद पृथ्वी पर नारायण स्वयं निवास करते हैं। इसीलिए इस नदी का नाम नारायणी कहा जाता है। इस बात का प्रमाण यह है कि श्यामवर्ण सालिग्राम भगवान की प्राप्ति का एकमात्र स्थल यही संगम तट है। भारतीय क्षेत्र में वाल्मीकिनगर और नेपाल में त्रिवेणी के नाम से यह स्थान जाना जाता है।

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