1970 में अत्याधुनिक तरीके से बना था ये काठ बंगला, अब बदल गई है इसकी सूरत, देखें तस्वीरें
जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूरी पर सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट में जंगल के बीच बना काठ बंगला आज अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है, कभी इसे देखने के लिए नेपाल, बिहार या अन्य जगहों से लोग आते थे।
1970 में बना यह लकड़ी का डाक बंगला इस समय के आधुनिक युग की सुविधाओं जैसा सब कुछ था, किचन में टाइल्स, बाथरूम, बरामदे के साथ अन्य जगह टाइल्स लगा था। बीते वक्त में जब भी कोई उच्चाधिकारी आते थे तो उसी बंगले में ठहरते थे।
उजड़ गई खिड़की, टूटा दरवाजा
बदहाल काठ बंगला कभी आलिशान था लेकिन अब इसकी खिड़कियां उखड़ गई हैं। दरवाजे भी टूट चुके हैं। सोहगीबरवा के ग्राम प्रधान विनय सिंह बताते है कि कभी यह डाक बंगला पांच सितारा स्टार होटल जैसी सुविधा वाला हुआ करता था। लेकिन अब खंडहर हो चुका है। गांव के प्रभुनाथ बताते हैं कि हम लोग अपने बाबा द्वारा इस बंगले की कहानी सुनते थे। बाबा बताते थे की रोज उसे देखने के लिए भीड़ लगती थी। यह जंगल की मजबूत लकड़ियों से यह बना है।
दो बेडरूम अटैच बाथरूम, एक किचन,एक डाइनिंग हाल, बरामदा। इंटीरियर के तहत सोफा, लाइटिंग आदि का कार्य कराया जाना है। जनरेटर, सोलर सिस्टम, वाटर फेसिलिटी आदि की भी सुविधा भी अलग से उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। इसकी जानकारी देते हुए डीएफओ पुष्प कुमार कांधला ने बताया कि 60 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद जरूरी कार्य कराया जाएगा।