उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर के मेंहदावल नगर को 'मंदिरों का नगर' कहा जाता है, यहां चारों तरफ ऐतिहासिक मंदिर विद्यमान हैं। इसी तरह ग्राम पंचायत सुअरहवा में एक दिन के हल्दी सोंठ के कारोबार से हुए मुनाफे से पंचमुखी शिव मंदिर की स्थापना की गई। इसके साथ ही यहां विशाल पोखरे का निर्माण भी कराया गया।
यहां हल्दी सोंठ के एक दिन के मुनाफे से बना था ये पंचमुखी शिव मंदिर, देखें भव्य तस्वीरें
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वर्तमान समय में नगर पंचायत प्रशासन करीब सवा तीन करोड़ रुपए की लागत से मंदिर व पोखरे का सुंदरीकरण कार्य पूरा करा रहा है तो वहीं यह मंदिर व्यवसाई के परिजनों ने गुरु गोरक्षनाथ मंदिर को दान करते हुए इसकी व्यवस्था व देखरेख की जिम्मेदारी प्रदेश के मुख्यमंत्री व गुरु गोरक्षनाथ के पीठेश्वर योगी आदित्यनाथ के सुपुर्द कर दिया है।
बहुत पहले की बात है मेंहदावल कस्बे के हरदीहट्टा निवासी व्यवसाई रामधन सेठ सुबह सैर सपाटे पर निकले थे कि पक्का पोखरा पर सैकड़ों बैल गाड़ियां हल्दी व सोठ लादकर खड़े थे। सेठ ने पूछा कि यह क्या है? तो बैलगाड़ी के साथ आए लोगों ने कहा कि इन बैल गाड़ियों में हल्दी व सोंठ लदा है। मेंहदावल कस्बे का नाम सुनकर यहां आया था लेकिन यहां किसी ने खरीदा ही नहीं, इस नगर का नाम झूठ में विख्यात है।
यह बात सुनकर रामधन सेठ ने कहा कि आपका जितना भी माल है उसे यही उतार दो, उसके पैसा दूंगा। इसके बाद अचानक एक ही दिन में हल्दी व सोंठ का रेट दोगुना हो गया। सेठ ने उसकी बिक्री से कमाए गए मुनाफे से अपने निजी जमीन में पंचमुखी शिव मंदिर व विशाल पोखरे का निर्माण कराया। आज भी रामधन सेठ की यह कहानी लोगों की जुबां पर है।
सुअरहवा में स्थित पंचमुखी शिव मंदिर व पोखरा ऐतिहासिक विरासत की पहचान बनी हुई है। वर्तमान समय में रामधन सेठ के परिजन आशुतोष जायसवाल, भवतोष, प्रवीण,अवनींद, पंकज व नीरज ने पंचमुखी शिव मंदिर पोखरा व अगल-बगल की जमीन गुरु गोरक्षनाथ मंदिर को दान करते हुए दान कर दिया।
वही नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मोतीलाल जायसवाल ने इस ऐतिहासिक विरासत को संवारने का संकल्प लिया और नगर पंचायत के प्रस्ताव पर करीब 3.25 करोड़ की लागत से मंदिर का सुंदरीकरण करने का प्रस्ताव भी पास करा लिया अब यह विरासत मेंहदावल नगर की पहचान बन गई है।
यहां हर साल नाग पंचमी के दिन विशाल मेला का आयोजन होता है। अगल-बगल के क्षेत्र व जनपद के कई हिस्सों के श्रद्धालु पंचमुखी शिव मंदिर पर पहुंचकर जलाभिषेक करते हुए अपनी मनोकामनां की पूर्ति करते हैं।