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Exclusive: जानिए कैसे सजा ध्रुव के सिर पर जीत का ताज, 31 साल पहले हुई थी राजनीतिक सफर की शुरुआत
Sat, 05 Dec 2020 03:52 PM IST
vivek shukla
परमात्मा शुक्ल, सिद्धार्थनगर।
परमात्मा शुक्ल, सिद्धार्थनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 05 Dec 2020 03:52 PM IST
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जीत का जश्न मनाते ध्रुव कुमार त्रिपाठी व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने वाले ध्रुव कुमार त्रिपाठी का मिलनसार और सहज व्यवहार अन्य पार्टी व संगठनों पर भारी पड़ गया। उनकी जीत लोगों के दलगत राजनीति और संगठनों के ताने-बाने से हटकर साथ देने का नतीजा है।
जीत का जश्न मनाते ध्रुव कुमार त्रिपाठी व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला।
सिद्धार्थनगर जिले के उसका कस्बे में स्थित बाबा हरिदास इंटर कॉलेज के शिक्षक ध्रुव कुमार त्रिपाठी की गिनती शुरू से ही मिलनसार और संगठन खड़ा करने वालों में रही। उन्होंने 1990 के दशक में ही माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के जिला मंत्री से शिक्षक राजनीति की शुरुआत की। ध्रुव कुमार 10 वर्ष तक जिला मंत्री और उसके बाद 10 वर्ष तक जिलाध्यक्ष रहे।
जीत का जश्न मनाते ध्रुव कुमार त्रिपाठी व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला।
तत्कालीन शिक्षक विधायक पंचानन राय के सड़क हादसे में आकस्मिक निधन के बाद शर्मा गुट ने ध्रुव की संगठनात्मक क्षमता और कार्यकुशलता को देखते हुए 2008 में एमएलसी का टिकट दिया। यह चुनाव जीतकर ध्रुव कुमार त्रिपाठी पहली बार एमएलसी बने। इसके बाद लगातार 2014 और 2020 समेत तीन बार जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाया।
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जीत का जश्न मनाते शर्मा गुट के लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
शिक्षक रामायन मिश्र और अरविंद झा कहते हैं कि कोई भी शिक्षक चाहे किसी भी संगठन या पार्टी से जुड़ा हो एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पास से निराश नहीं लौट सकता। वह सबकी सुनते और उनकी समस्या के निराकरण के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। शिक्षक राजनीति के जानकार कहते हैं कि इसी कार्यशैली का नतीजा रहा कि वह चुनाव में अन्य पार्टी और संगठनों पर भारी पड़ गए।
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जीत का जश्न मनाते ध्रुव कुमार त्रिपाठी व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने पहले ही खड़े कर दिए थे हाथ
प्रदेश के सभी सीटों पर चुनाव लड़ाने वाली भाजपा ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। जानकार कहते हैं कि इसके पीछे ध्रुव कुमार त्रिपाठी की शिक्षकों में लोकप्रियता भी प्रमुख कारणों में से एक थी, जिससे इस सीट पर हार का खतरा हो सकता था। वहीं सपा समेत वित्तविहीन शिक्षक महासंघ और अटेवा जैसे संगठन चुनाव में उनकी कार्यशैली से मात खा गए।
प्रदेश के सभी सीटों पर चुनाव लड़ाने वाली भाजपा ने गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। जानकार कहते हैं कि इसके पीछे ध्रुव कुमार त्रिपाठी की शिक्षकों में लोकप्रियता भी प्रमुख कारणों में से एक थी, जिससे इस सीट पर हार का खतरा हो सकता था। वहीं सपा समेत वित्तविहीन शिक्षक महासंघ और अटेवा जैसे संगठन चुनाव में उनकी कार्यशैली से मात खा गए।