उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में वैसे तो तमाम देवी स्थान हैं लेकिन मां लेहड़ा देवी मंदिर का ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। महाभारत काल में पांडवों ने इस क्षेत्र में वक्त गुजारा था। इतिहास के पन्नों में दर्ज मंदिर की पूरी कहानी में बहुत सारे रोचक तथ्य हैं। जिन्हें जानने को हर कोई उत्सुक रहता है।
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Mahabharat
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अरदौना में लेहड़ा देवी का मंदिर है। यह फरेंदा शहर से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर है। पुराने समय में यह स्थान आर्द्र वन नाम के सघन जंगल से घिरा हुआ था। पवह नदी के तट पर मां वनदेवी दुर्गा का मंदिर है। मान्यता है कि अरदौना देवी के मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों के अज्ञातवास काल में स्वयं अर्जुन ने की थी।
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Lehra Mandir
- फोटो : अमर उजाला।
पहले समय में इस मंदिर को अरदौना देवी स्थान के नाम से जाना जाता था। लेकिन बाद में इस मंदिर का नाम लेहड़ा देवी मंदिर रखा दिया गया। वर्तमान समय में यह मंदिर लेहड़ा देवी मंदिर के नाम से ही जाना जाता है। अज्ञातवास काल के दौरान अर्जुन ने इस जगह पर वनदेवी की पूजा की थी। अर्जुन की पूजा से प्रसन्न होकर वनदेवी मां भगवती दुर्गा ने उसे अमोध शक्तियां प्रदान की थीं।
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Lehra Mandir
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मंदिर के पुजारी पं. देवी दत्त पांडेय ने बताया कि कोरोना के वजह से मंदिर के कपाट श्रदालुओं के लिए बंद हैं। मां भगवती से प्रार्थना है कि देश को जल्दी कोरोना से मुक्त करें। कोरोना महामारी से पहले इस मंदिर में नेपाल, बिहार, गोरखपुर समेत आस पास के तमाम जिलों से श्रद्धालु आते थे। महाभारत काल में पांडवों ने इस क्षेत्र में कुछ वक्त गुजारा था। ऐसा इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
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वनदेवी मां ने युवती की रक्षा की
पांडवों के अज्ञातवास के दौरान मां भगवती के आदेशानुसार अर्जुन ने इस जगह पर शक्ति पीठ की स्थापना की थी। बाद में यहीं अदरौना देवी के नाम से प्रसिद्ध हुई। मान्यता है कि एक बार कोई युवती नाव से पवह नदी पार कर रही थी। तब उस युवती को देखकर नाविक की नियत खराब हो गई। उस समय वनदेवी मां ने स्वयं प्रकट होकर उस युवती की रक्षा की थी। नाविकों को नाव के साथ ही उसी समय जल समाधि दे दी थी।