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चौराचौरा घटना: 11 की मौत का बदला लेने के लिए 23 पुलिसवालों को जलाया था जिंदा, 19 को हुई थी फांसी

Fri, 05 Feb 2021 03:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 05 Feb 2021 03:08 PM IST
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चौरीचौरा घटना। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर के चौरीचौरा का नाम अंग्रेज सरकार की पुलिस चौकी को जला दिए जाने के कारण स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में दर्ज है। इस कांड में कुल 53 लोगों ने जान गंवाई थी। इसमें पुलिस की गोली से दम तोड़ने वाले सत्यग्रही भी शहीद माने जाते हैं और गुस्से का शिकार बने पुलिसवाले भी शहीद माने जाते हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...



 

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चौरीचौरा शताब्दी समारोह 2021 - फोटो : अमर उजाला।

बता दें कि 4 फरवरी सन 1922 को एक सिपाही ने सत्याग्रही की गांधी टोपी को पांव से रौंद दिया था। इसी पर सत्याग्रहियों का खून खौल उठा और जबरदस्त विरोध किया। इस पर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें 11 सत्याग्रही मौके पर ही शहीद हो गए जबकि 50 से ज्यादा घायल हो गए। गुस्साए क्रांतिकारियों ने पुलिस चौकी को आग लगाकर दारोगा समेत 23 पुलिसकर्मियों को जला दिया था, जिसमें 19 लोगों को फांसी की सजा हुई थी। महात्मा गांधी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार, अंग्रेजी पढ़ाई छोड़ने और चरखा चलाकर कपड़े बनाने का अह्वान किया था। उनका यह सत्याग्रह आंदोलन पूरे देश में रंग ला रहा था।

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चौरी-चौरा कांड - फोटो : अमर उजाला

4 फरवरी 1922 दिन शनिवार को चौरीचौरा के भोपा बाजार में सत्याग्रही इकट्ठा हुए और थाने के सामने से जुलूस की शक्ल में गुजर रहे थे। तत्कालीन थानेदार ने जुलूस को अवैध मजमा घोषित कर दिया। एक सिपाही ने गांधी टोपी को रौंदा तो ये देख सत्याग्रही आक्रोशित हो गए। विरोध किया तो पुलिस ने जुलूस पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें 11 सत्याग्रही मौके पर ही शहीद हो गए जबकि 50 से ज्यादा घायल हो गए। गोली खत्म होने पर पुलिसकर्मी थाने की तरफ भागे। भड़की भीड़ ने उन्हें दौड़ा लिया। थाने के पास स्थित दुकान से एक टीन केरोसीन तेल उठा लिया।

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चौरीचौरा थाना। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

मूंज और सरपत का बोझा थाना परिसर में बिछाकर उस पर केरोसीन उड़ेलकर आग लगा दी। थानेदार ने भागने की कोशिश की तो भीड़ ने उसे पकड़कर आग में फेंक दिया। इस कांड में एक सिपाही मोहम्मद सिद्दिकी भाग निकला और झंगहा पहुंच कर गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर को उसने घटना की सूचना दी।

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इसी चौरीचौरा पुलिस थाने को लगा दी गई थी आग। - फोटो : अमर उजाला।

इन पुलिसवालों की हुई मौत
थानेदार गुप्तेश्वर सिंह, उप निरिक्षक सशस्त्र पुलिस बल पृथ्वी पाल सिंह, हेड कांस्टेबल वशीर खां, कपिलदेव सिंह, लखई सिंह, रघुवीर सिंह, विषेशर राम यादव, मोहम्मद अली, हसन खां, गदाबख्श खां, जमा खां, मगरू चौबे, रामबली पाण्डेय, कपिल देव, इन्द्रासन सिंह, रामलखन सिंह, मर्दाना खां, जगदेव सिंह, जगई सिंह, और उस दिन वेतन लेने थाने पर आए चौकीदार बजीर, घिंसई,जथई व कतवारू राम की मौत हुई थी।

 

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