गोरखपुर में कोरोना का असर परिवहन निगम पर भी दिखने लगा है। जहां ज्यादातर कर्मी इससे संक्रमित हुए हैं वहीं आय घटने के कारण बसों को सरेंडर तक करना पड़ रहा है। निगम की रोजाना की आय में 60-65 प्रतिशत तक गिरावट आई है। गोरखपुर परिक्षेत्र में अबतक 54 बसों को सरेंडर किया जा चुका है।
तस्वीरें: गोरखपुर रोडवेज पर दिखने लगा कोरोना का असर, बसें की जा रहीं सरेंडर
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बाहर से आने वाले प्रवासियों को छोड़ दें तो यहां से सफर करने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। इससे रोडवेज को हर दिन घाटा हो रहा है। रोडवेज ने अपने खर्च को कम करने के लिए बसों को सरेंडर करने की शुरुआत कर दी है। इनमें सभी बसें निगम की शामिल हैं। हालांकि रोडवेज प्रशासन अनुबंधित बसों को भी सरेंडर करने के लिए मुख्यालय से बातचीत कर रहा है।
घट रही रोडवेज की आय
गोरखपुर क्षेत्र के पांचों डिपो में करीब 800 निगम की बसें हैं। इनके संचालन से रोडवेज को प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये का आय होती है, लेकिन कोरोना के कारण मई से ही यात्रियों की घटती संख्या से रोडवेज की आय पर भी असर पड़ा है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 35 से 40 लाख रुपये की आय अब रोडवेज को हो रही है। जैसे-जैसे बसों का संचालन बंद होता जा रहा है वैसे-वैसे आय में भी कमी आती जा रही है। यात्री कम हैं, ऐसे में खाली बसें चलाने के बजाए रोडवेज संचालन बंद करना ही बेहतर समझ रहा है। इससे रोडवेज को कम से कम बसों के टैक्स से तो राहत मिल रही है।
गोरखपुर डिपो 89 107 07
राप्तीनगर डिपो 84 49 52
गोरखपुर परिक्षेत्र की आय प्रतिदिन - एक करोड़ रुपये
लॉकडाउन में प्रतिदिन आय- 35-40 लाख रुपये
परिवहन निगम क्षेत्रीय प्रबंधक पीके तिवारी ने कहा कि यात्रियों की संख्या कम होने की वजह से रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा है। खड़ी बसों का टैक्स न देना पड़े, इसलिए अब बसों को सरेंडर किया जा रहा है। जब यात्रियों की संख्या बढ़ जाएगी तब बसों को वापस रोडवेज के बेड़े में शामिल कर लिया जाएगा।