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रोजी-रोटी के लिए मोहताज हुए सारी दुनिया का बोझ उठाने वाले ये लोग, ऐसे बिता रहे हैं दिन

Tue, 12 May 2020 03:14 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 12 May 2020 03:14 PM IST
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Railway coolies suffered due to lockdown in NER gorakhpur
gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का बोझ उठाकर अपना गुजारा करने वाले कुलियों पर कोरोना की बड़ी मार पड़ी है। लॉकडाउन में उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। ज्यादातर कर्ज के बोझ तले दबे हैं। कुछ तो दूसरे जिलों के हैं जो शहर में किराये के मकानों में रहते हैं। लॉकडाउन में घर भी नहीं जा सके। उधार और दूसरों के सहयोग से चूल्हा बड़ी मुश्किल से जल पा रहा है।

Railway coolies suffered due to lockdown in NER gorakhpur
gorakhpur railway station - फोटो : अमर उजाला।

कुछ ट्रेनों की आवाजाही के बाद भी उनका संकट कम होता नहीं दिख रहा है। रेलवे स्टेशन पर पंजीकृत कुलियों से बात की गई तो उनका दर्द छलक पड़ा। बोले, श्रमिक स्पेशल आ रही है लेकिन हमें जाने की इजाजत नहीं है। कुछ ट्रेनें चलाई जाने वाली हैं लेकिन वे भी इधर से होकर नहीं जाएंगी। वैसे भी इस संकट में ज्यादा सामान लेकर कोई नहीं चलेगा। कोरोना ने तो हमें भूखमरी की कगार पर ला दिया है।

Railway coolies suffered due to lockdown in NER gorakhpur
मो. वसी। - फोटो : अमर उजाला।

पांच हजार रुपये कर्ज हो गया
धर्मशाला बाजार के मो. वसी ने बताया कि लॉकडाउन जबसे लागू है, घर पर ही बैठे हैं। कमाकर बचाए रुपये भी खर्च हो गए। पांच हजार रुपयों का कर्जदार भी हो गया। ट्रेनें चलेंगी तो भी इतना सामान लेकर कोई नहीं जाएगा कि हमारी जरूरत पड़े। हमारा तो धंधा ही चौपट हो गया।

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Railway coolies suffered due to lockdown in NER gorakhpur
जाहिद अली। - फोटो : अमर उजाला।
एक हजार की मदद भी नहीं मिली
बस्ती के जाहिद अली ने बताया कि किराए पर कमरा लेकर परिवार के साथ रहता हूं। लॉकडाउन में घर भी नहीं जा सका। किसी तरह जुगाड़ और दूसरों की दरियादिली से घर का चूल्हा जल रहा है। एक हजार रुपये सरकार देने वाली थी, अभी तक बैंक खाते में नहीं पहुंचें हैं।
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Railway coolies suffered due to lockdown in NER gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : pti
गोरखपुर जंक्शन पर पंजीकृत हैं 139 कुली  
गोरखपुर जंक्शन पर इस समय 139 कुली पंजीकृत हैं। इन कुलियों को रेलवे की ओर से बिल्ला आवंटित किया गया है। इनमें कई कुली दूसरे जिलों से आकर शहर में रहते हैं।
 
यात्रियों का बोझ उठा सकते, पार्सल नहीं
रेलवे द्वारा कुलियों को इंगेज करते समय यह तय किया जाता है कि कुलियों को सिर्फ यात्रियों का लगेज उठाना है, पार्सल आदि नहीं उठाना है। लॉकडाउन में रेलवे ने पार्सल ट्रेन चलाई है लेकिन लाइसेंसधारी कुली इस ट्रेन से आए पार्सल को नहीं उठा सकते।
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