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तीन से छह महीने में शोध पत्र प्रकाशित करें चिकित्सक : डॉ. धर्मेंद्र
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- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो दिवसीय डेटा एनालिसिस एंड मैन्युस्क्रिप्ट राइटिंग कार्यशाला का समापन
गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय डेटा एनालिसिस एंड मैन्युस्क्रिप्ट राइटिंग (डीएएम) कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। समापन समारोह में प्राचार्य प्रो. डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने प्रतिभागियों से अगले तीन से छह महीने में कम से कम एक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय पबमेड इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित करने का लक्ष्य रखने को कहा। उन्होंने कहा कि शोध पत्र लिखना केवल कौशल नहीं बल्कि वैज्ञानिक ईमानदारी, धैर्य और जिम्मेदारी की परीक्षा है।
मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) की ओर से आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को शोध लेखन के उन्नत पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. निधि बेदी ने जर्नल चयन और वैज्ञानिक दुराचार पर जानकारी दी। प्रो. आमिर मारूफ खान ने मेथड्स सेक्शन की संरचना और शोध पद्धति लेखन का अभ्यास कराया। प्रो. पीयूष गुप्ता ने ऑथरशिप और एकनॉलेजमेंट्स के नैतिक पहलुओं के साथ डिस्कशन लेखन पर प्रशिक्षण दिया। सत्रों में रेफरेंस, एब्सट्रैक्ट और शोध पत्र के शीर्षक लेखन का भी अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को थिसिस और मैन्युस्क्रिप्ट के अंतर की टिप्पणियों का जवाब देने और शोध पत्र अस्वीकार होने के बाद आगे की रणनीति के बारे में बताया गया। वैज्ञानिक अंग्रेजी की सामान्य गलतियों पर भी चर्चा हुई।
डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध चिकित्सा विज्ञान की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे प्रशिक्षण संस्थान की शोध संस्कृति को मजबूत करते हैं। कार्यशाला में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 20, एम्स गोरखपुर के पांच, एम्स ऋषिकेश के पांच, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्दवानी के पांच और राजकीय मेडिकल कॉलेज पौड़ी गढ़वाल के पांच संकाय सदस्यों समेत 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी को प्रमाणपत्र और संसाधन व्यक्तियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
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गोरखपुर। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय डेटा एनालिसिस एंड मैन्युस्क्रिप्ट राइटिंग (डीएएम) कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया। समापन समारोह में प्राचार्य प्रो. डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने प्रतिभागियों से अगले तीन से छह महीने में कम से कम एक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय पबमेड इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित करने का लक्ष्य रखने को कहा। उन्होंने कहा कि शोध पत्र लिखना केवल कौशल नहीं बल्कि वैज्ञानिक ईमानदारी, धैर्य और जिम्मेदारी की परीक्षा है।
मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) की ओर से आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को शोध लेखन के उन्नत पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. निधि बेदी ने जर्नल चयन और वैज्ञानिक दुराचार पर जानकारी दी। प्रो. आमिर मारूफ खान ने मेथड्स सेक्शन की संरचना और शोध पद्धति लेखन का अभ्यास कराया। प्रो. पीयूष गुप्ता ने ऑथरशिप और एकनॉलेजमेंट्स के नैतिक पहलुओं के साथ डिस्कशन लेखन पर प्रशिक्षण दिया। सत्रों में रेफरेंस, एब्सट्रैक्ट और शोध पत्र के शीर्षक लेखन का भी अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को थिसिस और मैन्युस्क्रिप्ट के अंतर की टिप्पणियों का जवाब देने और शोध पत्र अस्वीकार होने के बाद आगे की रणनीति के बारे में बताया गया। वैज्ञानिक अंग्रेजी की सामान्य गलतियों पर भी चर्चा हुई।
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डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध चिकित्सा विज्ञान की सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे प्रशिक्षण संस्थान की शोध संस्कृति को मजबूत करते हैं। कार्यशाला में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 20, एम्स गोरखपुर के पांच, एम्स ऋषिकेश के पांच, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्दवानी के पांच और राजकीय मेडिकल कॉलेज पौड़ी गढ़वाल के पांच संकाय सदस्यों समेत 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी को प्रमाणपत्र और संसाधन व्यक्तियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
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