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जड़ से खत्म होगा टीवी: यहां ओपीडी के पांच फीसदी मरीजों की होगी टीबी जांच, जानिए कैसे होगी इनकी पहचान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 06 Mar 2021 10:22 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर के निजी और सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले पांच फीसदी मरीजों की टीबी जांच होगी। जिले के सभी चिकित्सक हर ओपीडी से क्षय रोग के संभावित लक्षणों वाले पांच प्रतिशत मरीजों को टीबी की जांच के लिए जिला अस्पताल रेफर करेंगे। इसकी जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क होगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के 100 मरीजों में तीन से पांच मरीज अधिकतम टीबी के मिल रहे हैं। यही वजह है कि अब यह फैसला लिया गया है कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में आने वाले मरीजों में पांच फीसदी की टीबी जांच कराई जाएगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
यह ऐसे मरीज होंगे जिनमें टीबी के संभावित लक्षण होंगे। इन लक्षणों में दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
बताया कि टीबी के मरीज की बिना जांच करवाए दवा चलाना अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए छह महीने की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। इसलिए अगर टीबी के मरीज मिलते हैं तो इसकी सूचना विभाग को जरूर दें।
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सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय।
- फोटो : अमर उजाला।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि टीबी की समाप्ति के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। टीबी मरीज की समय से पहचान हो जाने से उसका इलाज आसान हो जाता है। इसलिए सभी चिकित्सक अपने ओपीडी में ऐसे मरीजों की पहचान कर जांच जरूर करवाएं।
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