तीन महीने पहले कीमत में अनार और कश्मीरी सेब को टक्कर देने वाला प्याज अब गोदामों में सड़ रहा है। मंडी में प्याज का आवक अधिक है, वहीं होटल-रेस्टोरेंट बंद होने और समारोहों पर रोक होने से मांग आधी से भी कम रह गई है। ऐसे में प्याज कारोबारियों को जबरदस्त झटका लगा है।
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अफगानी प्याज
- फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन से पहले मार्च के शुरुआती हफ्तों में थोक मंडी में प्याज की कीमत 100 से 120 रुपये किलो थी। वहीं फुटकर मंडी में यह 120 से 140 रुपये किलो बिक रहा था। मार्च से ही प्याज की नई फसल आनी शुरू हो गई और उसके बाद लॉकडाउन लागू हो गया। ऐसे में इसकी मांग काफी घट गई और कीमतें अब 10 से 12 रुपये तक पहुंच गईं हैं।
धर्मशाला मंडी के फुटकर प्याज व्यापारी अनिल ने बताया कि थोक मंडी में प्याज सात सौ से एक हजार रुपये क्विंटल मिल रहा है। जिसे फुटकर में 10 से 12 रुपये किलो बेचा जा रहा है। जो लोग तीन महीने पहले 250 ग्राम प्याज से काम चला रहे थे, वे अब एक किलो प्याज खरीद रहे हैं।
प्याज व्यापारी फिरोज अहमद राइन ने बताया कि इन दिनों महाराष्ट्र के नासिक सहित सभी प्याज उत्पादक राज्यों से मांग की तुलना में दोगुनी आवक हो रही है। आवक अधिक होने से प्याज के दामों में कमी आ गई है। इससे व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्याज व्यापारी नौशाद ने बताया कि होटल व रेस्टोरेंट बंद हैं, शादी-विवाह तो हो रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण दावतें पहले की तरह से नहीं हो रही हैं। जिससे प्याज की खपत इस समय बहुत कम हो गई है।