पिछले साल कोरोना की दस्तक के बाद तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगा दिया गया था। जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा लागू इस कर्फ्यू का मकसद कोरोना वायरस को समुदायों के बीच फैलने से रोकना था। तब लोगों ने अपने घरों में रहकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका अदा की थी। दिसंबर से लेकर फरवरी के बीच संक्रमण खत्म होता नजर आ रहा था, लेकिन अब एक साल बाद वही हालात फिर से बनने की आशंका हर दिन बढ़ती जा रही है। महराजगंज वासी कोरोना को मात देकर विपरित हालात से जूझते हुए आगे बढ़ते गए।
जनता कर्फ्यू का एक साल: जिस जगह पर पहले छाया था सन्नाटा, तस्वीरों में देखिए कैसे हुआ गुलजार
22 मार्च को जिस स्थान पर सन्नाटा पसरा था। वहां आज गुलजार है। लोग समान्य ढंग से आते जाते दिखे। गुजरे वक्त की कड़वी यादों को भूलकर घर गृहस्थी की गाड़ी आगे बढ़ाने में लोग जुटे हैं। बस स्टेशन, हाइवे, अस्पताल, बाजार सभी स्थानो पर सन्नाटा पसरा रहा। जनता कर्फ्यू के बाद 25 मार्च को लॉकडाउन लग गया। एक साल पहले मार्च माह में कोरोना संक्रमण ने दस्कत दी। शुरूआत में संसाधनो का टोटा था। लेकिन इस महामारी से निपटने के लिए अब चिकित्सीय सेवाएं पहले की तुलता में काफी संबृद्ध हो चुकी हैं। इतना ही नहीं अब वैक्सीन भी उपलब्ध है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस महामारी से निपटने के लिए अनुभव मिला। सावधान होकर सभी ने मास्क लगाने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने आप को सुरक्षित किया। उस वक्त गली-गली सायरन की आवाज गूंजती थी। संक्रमित की मौत पर अपने भी कन्नी काट लेते थे। कहीं सैंकडों किमी दूर से पैदल चलकर आए मजदूरो को का रेला था, तो कहीं पेट की आगे बुझाने के लिए खाने के पैकेट का इंतजार लोग करते थे।
नगर सहकारी बैंक के सचिव विनय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महामारी से निपटने के लिए सभी लोगों ने एकजुट होकर मुकाबला किया। मजबूत हौसले से सभी ने कोरोना से जंग जीत लिया। सेंट जोसेफ स्कूल के प्रबंधक सीजे थामस ने बताया कि सरकार की ओर से बेहतर इंतजाम एवं प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से आपदा में बेहतर ढ़ंग से काम हुआ, जिसका परिणाम रहा कि जिले में कोरोना का संक्रमण कम हुआ।
अब तक 91 लोगों ने गवाई कोरोना से जान
बीते साल मार्च माह में कोरोना की शुरूआत हुई। लोग संक्रमित भी हुए और ठीक भी हुए। लेकिन इसमें गंभीर मरीजो की मौत हो गई। अब तक 91 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 5727 लोगों ने कोरोना से जंग जीता है।
कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े लोग
लाकडाउन के दौरान लोग घरो से न निकले, कोविड प्रोटोकाल का पालन करें, इसके लिए पुलिस ने लोगों को जागरूक किया। वहीं समाज के प्रबुद्ध लोगों ने इसमें पुलिस का साथ दिया। एनसीसी कैडेट, स्काउट गाइड, स्वंय सेवी संगठनो ने भी बढ़चढकर भागीदारी निभाई।
गांव-गांव पहुंची मेडिकल टीमें
कोरोना काल में स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरी ताकत से काम किया। गांव गांव मेडिकल टीमें लोगों की जांच करने में पहुंची। अस्पतालो में भी स्वास्थ्य कर्मियों ने पूरे मनोयोग से काम किया। हाट स्पाट बने गांवों में राशन पानी समेत अन्य जरूरी की सभी सामाग्री उपलब्ध कराई गई थी। वहीं क्वारंटीन सेंटर में प्रवासी मजदूरो को रखने की खाने की व्यवस्था थी। उन्हें गंतब्य तक पहुंचाने के लिए रोडवेज बस की व्यवस्था रही।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान बेहतर ढंग से काम हुआ। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरे मनोयोग से काम किया। चाहे प्रवासी मजदूरो को गंतव्य तक पहुंचाने की बात रही हो, यह उनको रहने खाने की, सब कुछ बेहतर इंतजाम रहा। यही कारण है कि जिले में कोरोना रिकवरी रेट काफी अच्छा है।