कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन, डेल्टा, डेल्टा प्लस और कप्पा से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ हर स्तर पर अधिक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैरिएंट की प्रसार तीव्रता पर मंथन चल रहा है। ऐसे में सलाह है कि मास्क, दो गज की दूरी और सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहें। यह ही सभी प्रकार के वैरिएंट को रोकने का सबसे बड़ा हथियार है।
Omicron: ओमिक्रॉन पहले के वैरिएंट्स से हो सकता है ज्यादा खतरनाक, विशेषज्ञों ने जाहिर की चिंता
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की तैयारी, अस्पतालों में बेड किए जा रहे हैं आरक्षित
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कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में होता है म्युटेशन
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि कम प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों को खतरा हर रोग में ज्यादा है। चिंता की बात यह है कि कम प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के अंदर वायरस का म्युटेशन भी ज्यादा होता है। पहली और दूसरी लहर में इस तरह के केस मिले भी हैं। जीनोम सीक्वेंसिंग में इसकी पहचान भी हो चुकी है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहली और दूसरी लहर में जीनोम सीक्वेसिंग के लिए ऐसे मरीजों के नमूने जांच के लिए भेजे थे, जिनके अंदर संक्रमण की दर ज्यादा थी।
जीनोम सीक्वेसिंग से खुला था नए वैरिएंट का राज
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि वैरिएंट की जानकारी पहली लहर में नहीं हो सकी थी, जबकि करीब छह से सात बार सैंपल लखनऊ से लेकर दिल्ली भेजे गए थे। इन सबके बीच दूसरी लहर में मौत अधिक होने की वजह से शासन ने जीनोम सीक्वेसिंग का फैसला लिया। जीनोम सीक्वेसिंग की जांच में डेल्टा, डेल्टा प्लस और कप्पा वैरिएंट की जानकारी मिली। इसके बाद से जिले में हड़कंप मच गया था। इन वैरिएंटों में सबसे अधिक मौत डेल्टा और डेल्टा प्लस के मरीजों की हुई थी।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां शुरू, बेड किए जा रहे आरक्षित
कोरोना के आसन्न खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत सरकारी अस्पतालों के बेड आरक्षित करने का काम शुरू कर दिया गया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 200 बेड के वार्ड सबसे पहले आरक्षित किए जाएंगे। इसके बाद 100 बेड टीबी अस्पताल, जिला अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी इस बार बेड आरक्षित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। विभाग के पास दूसरी लहर के बाद काफी मात्रा में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर भी रखे हुए हैं, जिनका इस्तेमाल भी किया जाएगा। इसके अलावा बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल, एम्स, महिला अस्पताल, 10 सीएचसी पर ऑक्सीजन प्लांट भी शुरू कर दिए गए हैं। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि विभाग की तैयारी लगभग पूरी है। पहले से सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। इस बार ऑक्सीजन की भी कोई कमी नहीं होने पाएगी। निजी अस्पतालों के सहयोग के लिए आईएमए से वार्ता की जाएगी।
कोरोना के नए वैरिएंट के जिले में प्रवेश से पहले स्वास्थ्य विभाग अपने सभी इंतजाम परखने की तैयारी में है। यही कारण है कि शासन की ओर से 13 दिसंबर को जिले के पांच अस्पतालों में मॉकड्रिल के निर्देश दिए गए हैं। इन अस्पतालों में पीडियाट्रिक आईसीयू के साथ ऑक्सीजन प्लांट भी लगाए गए हैं। इन अस्पतालों में कोविड वार्ड भी इस बार बनाए गए हैं। इनमें राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज बड़हलगंज, 100 बेड टीबी अस्पताल एयरफोर्स, सीएचसी कैंपियरगंज, हरनही और चौरीचौरा शामिल हैं।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि पहली और दूसरी लहर से सीख लेते हुए नए वैरिएंट से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार हमारे पास ऑक्सीजन की किल्लत भी नहीं होगी। बेड पहले से ही तैयार हैं। विदेश से आने वाले लोगों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर है। ऐसे लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराने का फैसला लिया गया है।