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Nag Panchami 2021: जानिए कैसे इस बार नाग पंचमी पर मिलेगी काल सर्प दोष से मुक्ति, बन रहा है खास संयोग

Wed, 11 Aug 2021 04:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 11 Aug 2021 04:29 PM IST
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Nag Panchami 2021 Know special coincidence of Nag Panchami get freedom from Kaal Sarp Dosh
नाग पंचमी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
नाग देवता की उपासना का पर्व नाग पंचमी 13 अगस्त शुक्रवार को मनाई जाएगी। वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस बार अमृत नामक महा औदायिक के दिन नागपंचमी है। इस दिन हस्त नक्षत्र है जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके साथ ही साध्य योग दिन में तीन बजकर 41 मिनट तक, इसके बाद शुभ योग है। ग्रह और नक्षत्रों का यह संयोग लोगों को काल सर्प दोष से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करेगा।


नाग पूजा से भगवान शिव का मिलता है आशीर्वाद
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, हिंदू धर्म में नाग को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शैय्या कहा गया है। ऐसे में माना जाता है कि नाग की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

ज्योतिष में नाग पंचमी का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं।
Nag Panchami 2021 Know special coincidence of Nag Panchami get freedom from Kaal Sarp Dosh
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
पंडित उपाध्याय ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। नाग को शिव का सेवक भी कहा जाता है। नाग भगवान शिव के गले में विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि नाग पृथ्वी को संतुलित करते हैं। ऐसे में उनकी उपासना का महत्व और भी बढ़ जाता है।
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पंडित बृजेश पांडेय। - फोटो : अमर उजाला
नाग पंचमी की पूजन-विधि
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस व्रत के एक दिन पूर्व यानि चतुर्थी को एक समय भोजन कर पंचमी तिथि को उपवास या फलाहार का नियम है। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्रती अपने घर के दोनों ओर नागों को चित्रित करके उनकी विधि पूर्वक पूजा करें।
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नाग पंचमी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं, इसलिए भक्तिभाव के साथ गंध, पुष्प, धूप, कच्चा दूध, खीर, भीगा हुआ बाजरा और घी से पूजन करें। सुगंधित पुष्प और दूध सर्पों को अति प्रिय होने से इस दिन लावा और दूध अर्पण किया जाता है। इस दिन सपेरों और ब्राह्मणों को भी लड्डू और दक्षिणा दान करें। अन्न, वस्त्र और फल भी निर्धनों को दें। ब्राह्मणों को खीर और मिष्ठान खिलाएं।
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ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
नाग पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, समुद्र मंथन से चौदह रत्नों में उच्चै:श्रवा नामक श्वेत अश्व रत्न प्राप्त किया गया था। उसे देखकर कश्यप मुनि की पत्नी कद्रू और विनता दोनों में अश्व के रत्न के संबंध में वाद विवाद हुआ। कद्रू ने कहा कि अश्व के केश श्याम वर्ण के हैं। यदि वह अपने कथन में असत्य सिद्ध हुईं तो वह विनता की दासी बन जाएंगी। कथन सत्य हुआ तो विनता उनकी दासी बनेंगी। कद्रू ने नागों को बाल के समान सूक्ष्म बनकर अश्व के शरीर में आवेष्ठित होने का आदेश दिया, लेकिन नागों ने असमर्थता प्रकट की। इस पर कद्रू ने क्रुद्ध होकर नागों को श्राप दिया कि पांडव वंश के राजा जनमेजय नाग यज्ञ करेंगे, उस यज्ञ में तुम सब जलकर भष्म हो जाओगे। श्राप से भयभीत नागों ने वासुकी के नेतृत्व में ब्रह्माजी से उपाय पूछा। भगवान ब्रह्मा ने कहा कि यायावर वंश में उत्पन्न तपस्वी जरत्कारू तुम्हारे बहनोई होंगे। उनका पुत्र आस्तीक तुम्हारी रक्षा करेगा। ब्रह्मा जी ने पंचमी तिथि को नागों को यह वरदान दिया तथा इसी तिथि पर आस्तीक मुनि ने नागों का परीरक्षण किया था। इसी दिन नाग पंचमी मनाई जाती है।
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