देवरिया जिले के शहीद संतोष यादव का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके गांव पहुंचा। शव यात्रा में जनसैलाब उमड़ गया। सुबह छह बजे रुद्रपुर में पार्थिव शरीर को लेकर पहुंची सेना की गाड़ी को देखते ही शहीद संतोष अमर रहे का नारा गूंजने लगा। करीब पांच किलोमीटर लंबी शव यात्रा के दौरान लोग फूल बरसा कर अमर शहीद को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते रहे। सड़क के दोनों तरफ रुद्रपुर के लाल का अंतिम दर्शन करने को महिलाओं की भीड़ लग गई।
सलाम: शहीद की शव यात्रा में उमड़ा जन सैलाब, पांच किमी लंबे अंतिम सफर में लोगों ने बरसाए फूल
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शहीद संतोष का सपना पूरा करेंगी पत्नी धर्मशीला
अमर शहीद संतोष यादव की पत्नी धर्मशीला शहीद के सपनों को पूरा करेंगी। उन्होंने कहा कि संतोष का सपना था कि उनकी दोनों बेटियां डॉक्टर बनें। वह आठ साल की पलक और छह साल की जाह्नवी को डॉक्टर बनाने के लिए शुरू से अच्छे संस्थान में दाखिला कराना चाहते थे।
शहीद की पत्नी ने सरकार से मांग की है कि दोनों बेटियों को चिकित्सा शिक्षा दिलाने के लिए सुविधा मुहैया कराई जाए। उन्होंने शहीद के सपने को पूरा करने लिए खुद की सरकारी नौकरी की मांग की है। कहा है कि वह अपने पति की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहती हैं। उनके सपनों को पूरा करना ही मेरे जीवन का अंतिम उद्देश्य है।
बहन को खाए जा रहा भाई के जाने का गम
अमर शहीद संतोष यादव की छोटी बहन माया की हालत नाजुक हो गई है। वह भाई की शहादत की खबर मिलने के बाद से ही सुधबुध खो चुकी है। रविवार को उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डाक्टर उसे ड्रिप चढ़ा रहे हैं। वह सदमे में है। शहीद की तीन बहनें हैं। दो की शादी हो चुकी है। छोटी बहन माया अविवाहित है।