राप्ती, गोर्रा फरेन नाला आदि नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बाढ़ से सुरक्षा के लिए बनाए गए बांध काफी कमजोर हैं। ग्रामीण इस बात को लेकर काफी चिंतित हैं कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो कमजोर बांध कभी भी टूट सकता है। उधर, कैंपियरगंज क्षेत्र के सरुआताल में उफान से ग्रामीणों में दहशत है। पानी गांवों की ओर बढ़ रहा है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
फरेन नाले पर स्थित नेकवार बोहाबार विस्तार बांध का बृहस्पतिवार को ग्राम जंगलरसूलपुर नंबर 2 के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शेषनाथ यादव व बाढ़ खंड के जेई ने बंधे की मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। क्षेत्र के जितने बंधे हैं उनमें सबसे अति संवेदनशील फरेन नाले का बांध है। इसलिए इस बांध पर विभाग की नजर है।
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गोरखपुर में बाढ़।
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बंधे के कमजोर स्थानों पर बांस बल्ली लगा कर मिट्टी भरी बोरियों से पिचिंग का कार्य कराया जा रहा है। बता दें कि 14 जुलाई को बंधे के जीरो से एक किलो मीटर की दूरी पर लगभग 300 मीटर बंधा काफी जर्जर होकर रिसाव हो रहा था। बाढ़ खंड के एक्सईएन और एसडीओ के प्रयास से रिसाव को बालू, गिट्टी आदि से रोका गया था।
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गोरखपुर में बाढ़।
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वहीं कैंपियरगंज क्षेत्र के सरुआताल के उफान से बृहस्पतिवार को मुसाबर, छितही बुजुर्ग मार्ग पर पानी सड़क से बहकर गांव के तरफ जा रहा है जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का भय बढ़ गया है। इस रास्ते से दर्जनों गांव के लोगों का आवागमन बंद हो गया।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
पवहनाला के माध्यम से पानी सरुआताल में तेज गति से आ रहा है जिससे बनकटा, ककटही, मुसाबर, मिरिहिरिया, खजुरगांवा, बहबोलिया, रिगौली सहित अन्य गांवों की काफी फसल डूब गई है। अगर पानी बढ़ने का क्रम यही रहा तो गांव में भी पानी घुस सकता है। बताया जाता है कि इस मार्ग पर दर्जनों गांव के लोग धानी फरेंदा तक आते जाते है। मार्ग पर पानी आ जाने से रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।