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जन्माष्टमी विशेष: यूपी के इस जिले के किसी भी थाने में 27 साल से नहीं मनाई गई जन्माष्टमी, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान
Mon, 30 Aug 2021 02:23 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 30 Aug 2021 02:23 PM IST
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पुलिसकर्मियों की याद में बना शहीद द्वार व शहीद कांस्टेबल की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
कुशीनगर पुलिस 30 अगस्त, 1994 की तारीख को कभी नहीं भूलती। चाहे बड़े अफसर हों या, थानेदार, दरोगा अथवा सिपाही। जन्माष्टमी उस रात वर्दी की आन और लोगों की सुरक्षा के लिए पचरुखिया में जंगल डकैतों से मुठभेड़ के दौरान तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय और कुबेरस्थान के एसओ राजेंद्र यादव सहित छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यही वजह है कि उस घटना के बाद से कुशीनगर के किसी भी थाने में जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। पडरौना कोतवाली का स्मृति द्वार और यहां का शिलापट्ट उन जांबाज पुलिसकर्मियों की गवाही देता है। इस बार भी पुलिस जन्माष्टमी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में जुटी है, लेकिन परंपरा को कायम रखते हुए जन्माष्टमी किसी भी थाने में न मनाने का इस बार भी निर्णय लिया गया है।
पुलिसकर्मियों की याद में बने शहीद द्वार पर लगा स्मारक।
- फोटो : अमर उजाला।
इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल पांडेय की जिले में तैनाती हुई। 13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला अस्तित्व में आया, तो अनिल पांडेय को बिहार बॉर्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली। 30 अगस्त 1994 की रात में कुबेरस्थान थानाक्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैतों के आने की सूचना पुलिस को मिली थी। उस दिन जन्माष्टमी था।
शहीद कांस्टेबल विश्वनाथ यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
कुशीनगर के पहले एसपी के रूप में कार्य संभालने वाले तत्कालीन एसपी बुद्धचंद ने पडरौना के कोतवाल योगेंद्र प्रताप, तरयासुजान थाने के तत्कालीन एसओ अनिल और कुबेरस्थान थाने के तत्कालीन एसओ राजेंद्र यादव को वहां भेजा था। रात के करीब साढ़े नौ बजे वहां जाने पर पता चला कि डकैत पचरुखिया गांव में हैं, तो पुलिसकर्मियों ने नाविक भुखल को बुलाकर डेंगी (छोटी नाव) को उस पार ले गए। भुखल ने दो बार में डेंगी से पुलिसकर्मियों को बांसी नदी के उस पार पहुंचा दिया, लेकिन डकैतों का सुराग नहीं लगा। पहली खेप के पुलिसकर्मी वापस हो गए, लेकिन दूसरी टीम के डेंगी में सवार होकर आगे बढ़ते ही बदमाशों ने पुलिस टीम पर बम से हमला कर दिया था और ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। इसमें पहले तो नाविक भुखल व सिपाही विश्वनाथ यादव को गोली लगी, जिससे डेंगी अनियंत्रित हो गई।
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शहीद पुलिसकर्मियों की याद में पडरौना कोतवाली में बना शहीद द्वार।
- फोटो : अमर उजाला।
इसी डेंगी में एसओ अनिल पांडेय और अन्य पुलिसकर्मी थे। पुलिसकर्मी जवाबी फायरिंग करते रहे। मुठभेड़ थमने के बाद डेंगी सवार पुलिसकर्मियों की खोजबीन की गई। जहां तरयासुजान एसओ अनिल पांडेय, कुबेरस्थान के एसओ राजेंद्र यादव, तरयासुजान थाने के आरक्षी नागेंद्र पांडेय, पडरौना कोतवाली में तैनात आरक्षी खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव व परशुराम गुप्त मृत पाए गए थे। नाविक भुखल भी मारा गया था, जबकि दरोगा अंगद राय, आरक्षी लालजी यादव, श्यामा शंकर राय और अनिल सिंह सुरक्षित बच गए थे। इस घटना में कोतवाल योगेंद्र सिंह ने कुबेरस्थान थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था।
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शहीद पुलिस कर्मियों की याद में बनाया गया प्रवेश द्वार।
- फोटो : अमर उजाला।
नहीं मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
एसपी सचिंद्र पटेल ने बताया कि पचरुखिया में 27 साल पहले जंगल डकैतों से हुई मुठभेड़ में पुलिस विभाग ने अपने छह जांबाज पुलिसकर्मियों को खो दिया था। वह घटना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुई थी। तभी से कुशीनगर के किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। इस बार भी किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाएगी, लेकिन जिले में यह त्योहार शांतिपूर्ण और कोविड गाइडलाइन के तहत मनाया जाएगा। कहीं न मेला लगेगा और न ही जुलूस निकलेगा। इसका पालन कराने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दे दिया गया है।
एसपी सचिंद्र पटेल ने बताया कि पचरुखिया में 27 साल पहले जंगल डकैतों से हुई मुठभेड़ में पुलिस विभाग ने अपने छह जांबाज पुलिसकर्मियों को खो दिया था। वह घटना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुई थी। तभी से कुशीनगर के किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती है। इस बार भी किसी थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाएगी, लेकिन जिले में यह त्योहार शांतिपूर्ण और कोविड गाइडलाइन के तहत मनाया जाएगा। कहीं न मेला लगेगा और न ही जुलूस निकलेगा। इसका पालन कराने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दे दिया गया है।