{"_id":"5fb647418ebc3e9c0724bfa5","slug":"indira-gandhi-birthday-special-story-connection-mahant-digvijay-nath","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इंदिरा गांधी गोरखपुर के इस महंत के निधन पर हो गई थीं दुखी, कहा था- 'ऐसे लोग धरती पर नहीं मिलते'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंदिरा गांधी गोरखपुर के इस महंत के निधन पर हो गई थीं दुखी, कहा था- 'ऐसे लोग धरती पर नहीं मिलते'
टीपी शाही, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 19 Nov 2020 04:09 PM IST
विज्ञापन
1 of 6
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी व महंत दिग्विजय नाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
आज पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 103वें जन्मदिन के अवसर पर हम आपको उनसे जुड़ी खास कहानी बताने जा रहे हैं। यह कहानी इंदिरा गांधी और ब्रम्हलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर दिग्विजय नाथ की है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
2 of 6
महंत दिग्विजय नाथ।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि ब्रह्मलीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ 1967 में हिंदू महासभा के बैनर पर लोकसभा में पहुंचे थे। 1969 में उनका निधन हो गया था, उनके निधन पर देश भर के नेताओं ने शोक जताया था। इस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी शोक संवेदना प्रकट करते हुए उन्हें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी करार दिया था।
3 of 6
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि महंत जी का शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में बहुत ही ऊंचा स्थान है। वे असहयोग आंदोलन के साथ भी जुड़े थे। साइमन कमीशन का उन्होंने पुरजोर विरोध किया था। इसलिए वह हमेशा अंग्रेजों के निशाने पर रहते थे। इनके जैसा इंसान धरती पर रोज पैदा नहीं होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और महंत दिग्विजयनाथ। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
इंदिरा गांधी ने कहा था महंत दिग्विजय नाथ हैदराबाद सत्याग्रह से भी जुड़े थे। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय के स्थापना का महान कार्य किया। ऐसे महापुरुष के जाने से वह बहुत ही व्यथित हैं, मेरी शोक संवेदना उनके धर्म परिवार तक पहुंचाई जाए।
वहीं अटल बिहारी वाजपेई ने अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि महंत दिग्विजय नाथ भारत के निर्माण में अपना योगदान दे रहे थे। वह स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों में से एक थे, जिन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।