उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित राप्ती नदी के दोनों तटों पर बने गुरु गोरक्षनाथ व श्रीराम घाट की सुंदरता देखते ही बनती है। इन तटों पर आने वाले ही नहीं राजघाट पुल से गुजरने वाले लोग भी इनके सौंदर्य को निहारे बिना आगे नहीं बढ़ पाते। हालांकि अब यहां की तस्वीर बदल गई है। अब यहां कोरोना संक्रमितों के शवों की लंबी लाइन लग रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
यूपी: यहां करोड़ों की सुंदरता पर लगा लाशों का पहरा, 13 घंटे में 50 से ज्यादा शवों का हुआ दाह संस्कार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर राजघाट स्थित शवदाह गृह पर रविवार को 50 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार किया गया। यह आंकड़ा सुबह से रात आठ बजे तक है। देररात तक शव दाह का सिलसिला चलता रहा। बता दें शवों की संख्या ज्यादा होने की वजह से नगर निगम की ओर से टोकन की व्यवस्था की गई है। ऐसे में कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
राजघाट शवदाह गृह पर तैनात नगर निगम के कर्मचारियों का कहना है कि एक साथ 10-10 शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। निगरानी के लिए सफाई इंस्पेक्टर महेश यादव समेत चार सुपरवाइजर लगे हैं।
अपने हुए बेगाने
कोरोना वायरस की भयावहता ने अपनों को बेगाना कर दिया है। नगर निगम कर्मियों का कहना है कि राजघाट शवदाह गृह पर ऐसे कई शव आ रहे हैं, जिनके साथ कोई परिजन नहीं होता। संक्रमित की मौत के बाद परिजन शव वाहन बुलाते हैं।
शव को वाहन में रखवाकर कुछ पैसे देते हैं, फिर कहते हैं कि अंतिम संस्कार करा देना। जब शव राजघाट पहुंचते हैं तो निगम कर्मी दाह संस्कार कर देते हैं। यही नहीं, दाह संस्कार के बाद परिजनों की अस्थि तक लेने लोग नहीं आ रहे हैं।