उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के तमकुहीरोड कस्बे का शहीद स्मारक अगस्त क्रांति का गवाह है। अंग्रेजी हुकूमत का विरोध करने वालों पर गोली चलाई गई थी। जिसमें इस मिट्टी के 11 सपूतों के खून से धरती लाल हो गई थी। इनकी शहादत को सलाम करने के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू भी आए थे और उन्होंने ही शहीद स्मारक की आधारशिला रखी थी।
Independence day 2020: आजादी के योद्धाओं पर यहां बरसाई गई थी गोलियां, 11 लोग हुए थे शहीद
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नौ अगस्त 1942 को जब महात्मा गांधी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया था तो उस समय तमकुहीरोड क्षेत्र के नौजवान भी इस लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे। 12 अगस्त 1942 को यहां के लोगों ने रेल लाइनों को उखाड़ दिया और रेलवे स्टेशन को भी क्षति पहुंचाई थी। दूसरे दिन 13 अगस्त को कांग्रेस मंडल (कांग्रेस कार्यालय) पर क्षेत्र के हजारों लोग एकत्र हुए और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सभा करके रेलवे स्टेशन, चीनी मिल और डाकखाने पर तिरंगा फहराने का निर्णय लिया गया। इसके बाद हाथ में तिरंगा लिए आजादी के दीवानों ने कूच कर दिया।
इसकी भनक चीनी मिल परिसर में रह रहे अंग्रेज अफसरों को लग गई और स्वाधीनता संग्राम सेनानियों को रोकने के लिए हथियारबंद अंग्रेज अफसर पुलिस जवानों के साथ रेलवे माल गोदाम पर मोर्चा संभाल लिए। बावजूद इसके क्षेत्र के रणबांकुरों का जत्था भारत माता का जयघोष करते हुए रेलवे मालगोदाम की तरफ बढ़ने लगा।
लोगों की भारी भीड़ को देखकर मुठ्ठीभर अंग्रेज अफसर घबरा गए और लोगों को वापस लौट जाने की चेतावनी देने लगे। लेकिन जब आजादी के दीवाने नहीं रुके तो उन पर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में जानकी चौबे, जतन, मथुरा सिंह, धरीक्षण राय, रघुबीर, रामानंद, लुटावन सिंह, भोला, फेंकू भगत, भुईलोट और मंगला राय को गोली लगी। इसमें से कुछ ने मौके पर तो कुछ लोगों ने बाद में जान गंवा दी थी।
तमकुहीरोड के इस घटना की खबर महात्मा गांधी तक पहुंची तो उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू को इन वीर सपूतों की शहादत की जानकारी लेने तथा अन्य आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाने के लिए तमकुहीरोड भेजा। तमकुहीरोड आकर पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इन शहीदों की याद में स्मारक स्थल की नींव रखी तथा लोकमान्य कॉलेज के विजिटर बुक पर हस्ताक्षर भी किया था।