कोरोना वायरस का खौफ लोगों में ऐसा है कि हल्का सर्दी-जुकाम होने पर भी लोग इलाज के लिए सीधे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। यही कारण है कि जहां प्रतिदिन ढाई हजार की ओपीडी जिला अस्पताल में होती थी, अब इसकी संख्या बढ़कर 3000 से अधिक हो गई है। सोमवार को अस्पताल में सबसे अधिक संख्या सर्दी-जुकाम के मरीजों ( करीब पांच सौ) की रही। डॉक्टरों ने सलाह दी कि बिना वजह घबराएं नहीं। मौसम परिवर्तन के कारण सर्दी-जुकाम की समस्या बढ़ी है। कोरोना का डर बिल्कुल नहीं है। अपने आसपास सफाई रखें।
कोरोना: शरीर में ये लक्षण दिखाई देते ही तुरंत जाएं अस्पताल, दवा खरीदकर खाना हो सकता है घातक
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जिला अस्पताल में पिछले तीन-चार दिनों में सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ी है। लोग कोराना वायरस के डर की वजह से जांच के लिए सीधे डॉक्टर की शरण में पहुंच रहे हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। कैंपियरगंज से आए सुरेश कुमार ने बताया कि तीन-चार दिनों से सर्दी-जुकाम था। टोल फ्री नंबर पर फोन किया गया तो बताया गया कि नजदीकी जिला अस्पताल में जाकर जांच कराएं। यही वजह है कि यहां आ गए। गुलहरिया के रामकिशोर ने बताया कि सर्दी जुकाम और बुखार एक सप्ताह से है। कोरोना न हो इसलिए जांच के लिए आया हूं।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके सिंह ने बताया कि सर्दी जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीज कोरोना वायरस के डर से जिला अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे है। मौजूदा समय में तीन हजार से अधिक की ओपीडी चल रही है। इसमें सबसे अधिक संख्या बुखार और सर्दी जुकाम के मरीजों की है। उन्होंने कहा यदि आपको खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बह रही हो, गले मे खराश आदि हो तो तत्काल अस्पताल जाएं और इलाज कराएं। अन्य किसी तरह की दिक्कत हो तो परेशान न हों। बस कुछ दिन आराम करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली चीजें खाएं। इससे बुखार व अन्य समस्या दूर हो जाएगी।
82 फीसदी लोगों को दवा की जरूरत नहीं
कोरोना वायरस से संक्रमित 82 प्रतिशत मरीजों को किसी दवा की जरूरत नहीं होती है। इन्हें होम क्वारंटाइन या फिर आइसोलेशन वार्ड में रखकर ही ठीक किया जा सकता है। केजीएमयू में दो मरीजों के ठीक होने के बाद उसी प्रक्रिया को अपनाने की शुरुआत जिला अस्पताल प्रशासन करेगा। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ एके सिंह ने बताया कि संक्रमण से बचने के लिए कोई दवा खाने की जरूरत नहीं है अगर मरीजों का श्वसन प्रक्रिया बेहतर है। ऐसे मरीजों का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम है। यही कारण है कि ऐसे केस में निगरानी करने की सलाह दी जा रही है।
कोरोना वायरस का संक्रमण गंभीर है, ऐसे में मरीज को निमोनिया हो गया है तो उसे एड्स के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं दी जाती हैं। डॉक्टर की सलाह से ही दवाएं ली जाएं तभी फायदेमंद होगा। खुद दवा खरीदकर खाना घातक हो सकता है।