दिल्ली की तर्ज पर गोरखपुर जोन की पुलिस को भी हाईटेक किया जाएगा। इसके तहत अब बीट सिपाही का अधिकार बढ़ाने के साथ ही उनकी जिम्मेदारी भी तय की गई है। अब सिपाही अपने इलाके के लोगों से संपर्क करेंगे और उत्पातियों को खुद ही 107/16 में पाबंद भी करेंगे। इसके अलावा थाने में आने वाले प्रार्थना पत्र की जांच मौके पर जाकर करने के साथ ही सिपाही आख्या रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद दारोगा और थानेदार उस पर निरोधात्मक कार्रवाई करेंगे। एडीजी जोन अखिल कुमार ने इस संबंध में जोन के सभी एसपी को आदेश जारी कर दिए हैं।
अब दिल्ली की तर्ज पर हाईटेक होगी यूपी के इस जोन की पुलिस, इस खास वजह से बढ़ाई गई सिपाहियों की जिम्मेदारी
इसलिए सिपाहियों की बढ़ाई गई जिम्मेदारी
दरअसल, बीते दिनों गोंडा में एडीजी अफसरों के साथ मीटिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक बाइक चोर गिरोह के पकड़े जाने की जानकारी मिली। गिरोह का सरगना बस्ती के पशुरामपुर निवासी राजेश पांडेय था। गांव में उसका काफी उत्पात था, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं थी। पकड़े जाने के बाद मामला खुलकर सामने आया। एडीजी ने पीआरओ से बीट सिपाही से बात करने को कहा। पता चला कि बीट सिपाही को राजेश पांडेय के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जबकि थाने में उसके खिलाफ कई बार शिकायत आ चुकी थी। उधर, जब गांव के लोगों से संपर्क किया गया तो पता चला कि राजेश पांडेय अपने घरवालों से रोज ही मारपीट करता था। आए दिन रुपये छीन लेता था और इसकी शिकायत थाने तक भी पहुंची थी। इसी मामले के बाद एडीजी ने अब बीट सिपाही की जिम्मेदारी तय कर दी है।
एडीजी अखिल कुमार ने अपनी दिल्ली प्रतिनियुक्ति के दौरान की एक घटना का हवाला देते हुए बताया कि एक दिन वह घर पर थे तो बीट सिपाही ने आकर अपना मोबाइल नंबर दिया। बाद में पड़ोस में चोरी की घटना हुई तो 100 नंबर डायल करने के बाद जब बीट सिपाही के नंबर पर संपर्क किया गया तो वह तत्काल सक्रिय हो गया।
एडीजी ने कहा कि अगर बीट सिपाही का नंबर लोगों के पास होगा तो वह सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं। एडीजी ने कहा कि बीट सिपाही अपने इलाके में जाएगा और हर गतिविधि पर नजर रखेगा, तो उसके पास मनबढ़ों की जानकारी रहेगी। इससे उनके खिलाफ कार्रवाई में आसानी होगी।
एडीजी जोन अखिल कुमार ने बताया कि बीट सिपाही को अराजक तत्वों को पाबंद करने की जिम्मेदारी और प्रार्थना पत्र की जांच करने का निर्देश दिया गया है। वह क्षेत्र में जाएं और लोगों से संपर्क कर मोबाइल नंबर का आदान प्रदान करें ताकि उन्हें क्षेत्र से सूचनाएं मिलती रहें। इस जानकारी का इस्तेमाल अपराध पर अंकुश में किया जा सकता है।