2020 की शुरूआत में गोरखपुर विकास के पथ पर सवार होकर एक नई इबारत लिखने जा रहा था। लेकिन कोरोना वायरस के कारण यहां की कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हो गई। आइए हम आपको इन खास 10 परियोजनाओं के बारे में बताने जा रहे हैं।
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साल 2020 में गोरखपुर की इन 10 परियोजनाओं पर लगा 'कोरोना का ग्रहण', जानिए कब होने वाली थी शुरुआत
Sat, 09 May 2020 01:58 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 09 May 2020 01:58 PM IST
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gorakhpur news
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Gorakhpur airport
- फोटो : अमर उजाला
01- गोरखपुर एयरपोर्ट
गोरखपुर में हवाई सेवा के लिए साल 2020 बहुत खास था। यहां तीन फ्लोर का नया टर्मिनल बनाने की तैयारी की जा रही थी। करीब 22 करोड़ की लागत से बन रहे 350 यात्रियों की क्षमता वाले इस टर्मिनल के लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया आखिरी चरण पहुंच गई थी। लेकिन कोरोना वायरस के कारण इसकी रफ्तार कम हो गई।
गोरखपुर में हवाई सेवा के लिए साल 2020 बहुत खास था। यहां तीन फ्लोर का नया टर्मिनल बनाने की तैयारी की जा रही थी। करीब 22 करोड़ की लागत से बन रहे 350 यात्रियों की क्षमता वाले इस टर्मिनल के लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया आखिरी चरण पहुंच गई थी। लेकिन कोरोना वायरस के कारण इसकी रफ्तार कम हो गई।
Gorakhpur Zoo
- फोटो : अमर उजाला
02- गोरखपुर चिड़ियाघर
सीएम योगी ने गोरखपुर वासियों को चिड़ियाघर के रूप में एक बड़ी सौगात दी। वहीं प्रदेश के वन मंत्री ने भी दावा किया है कि गोरखपुर का शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) देश का सबसे बेहतरीन होगा। इसका निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होना था लेकिन कोरोना के कारण इसके निमार्ण में भी देरी हो गई। 20 अप्रैल से लॉकडाउन में ढील के बाद इसका काम शुरू हो गया है। हालांकि अभी यहां मजदूरों की संख्या बहुत कम है।
सीएम योगी ने गोरखपुर वासियों को चिड़ियाघर के रूप में एक बड़ी सौगात दी। वहीं प्रदेश के वन मंत्री ने भी दावा किया है कि गोरखपुर का शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) देश का सबसे बेहतरीन होगा। इसका निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होना था लेकिन कोरोना के कारण इसके निमार्ण में भी देरी हो गई। 20 अप्रैल से लॉकडाउन में ढील के बाद इसका काम शुरू हो गया है। हालांकि अभी यहां मजदूरों की संख्या बहुत कम है।
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Gorakhpur forensic lab
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03- फॉरेंसिक लैब
गोरखपुर में कोई बड़ी घटना होने पर उसके साक्ष्य को लखनऊ जांच के लिए भेजा जाता है। इसे देखते हुए गोरखपुर में ही फॉरेंसिक लैब की शुरुआत करने की पहल की गई। इसका काम भी शुरू हो गया और इसे मार्च 2020 तक पूरा होना था लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
गोरखपुर में कोई बड़ी घटना होने पर उसके साक्ष्य को लखनऊ जांच के लिए भेजा जाता है। इसे देखते हुए गोरखपुर में ही फॉरेंसिक लैब की शुरुआत करने की पहल की गई। इसका काम भी शुरू हो गया और इसे मार्च 2020 तक पूरा होना था लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
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Gorakhpur Fertilizer
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04- खाद कारखाना
करीब ढाई दशक से बंद खाद कारखाने की जगह नया कारखाना 2020 के अंतिम तक बनकर तैयार होने की बात कही जा रही थी लेकिन फिलहाल ऐसा हो पाना मुमकिन नहीं नजर आ रहा है। सात हजार करोड़ की लागत से बन रहे इस खाद कारखाने से रोजाना 3850 मीट्रिक टन खाद का उत्पादन होगा। जापानी कंपनी टोयो इसका निर्माण करा रही है। इस कारखाने का 149.5 मीटर ऊंचा प्रिलिंग टॉवर दुनिया के सभी खाद कारखानों के प्रिलिंग टॉवर से ऊंचा है।
करीब ढाई दशक से बंद खाद कारखाने की जगह नया कारखाना 2020 के अंतिम तक बनकर तैयार होने की बात कही जा रही थी लेकिन फिलहाल ऐसा हो पाना मुमकिन नहीं नजर आ रहा है। सात हजार करोड़ की लागत से बन रहे इस खाद कारखाने से रोजाना 3850 मीट्रिक टन खाद का उत्पादन होगा। जापानी कंपनी टोयो इसका निर्माण करा रही है। इस कारखाने का 149.5 मीटर ऊंचा प्रिलिंग टॉवर दुनिया के सभी खाद कारखानों के प्रिलिंग टॉवर से ऊंचा है।