आज हम आपको उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक ऐसे थाने के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसकी कहानी जानकर आपको एक बार यकीन नहीं होगा। बता दें कि यह थाना 'स' से शुरू होने वाले नाम के कोतवाल की वजह से सुर्खियों में रहा है।
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कोतवाली शाहपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
हम बात कर रहे हैं गोरखपुर जिले के शाहपुर थाने की। एक बार फिर 'स' से शुरू होने वाले नाम के कोतवाल की वजह से यह थाना सुर्खियों में है। माना जाता है कि जब भी यहां पर कोतवाल के नाम की शुरुआत 'स' से होती है तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। ऐसा पहले भी हुआ है और बीते साल नवंबर दिसंबर में भी एक मामला सामने आया था।
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कोतवाली शाहपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
पिपराईच विधायक महेंद्र पाल सिंह के भाई और कोतवाल के बीच मामूली बात को लेकर जंग छिड़ी गई थी। गाड़ी भिड़ने के मामूली विवाद में विधायक के भाई की कथित पिटाई मामले में शाहपुर इंस्पेक्टर सुधीर कुमार सिंह विवादों में घिरे थे। इसके बाद उनकी तैनाती गोरखपुर जिले के गीडा थाने में कर दी गई है। कई लोग कहते हैं कि शाहपुर में 'स' शब्द के कोतवाल सूट नहीं करते हैं।
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कोतवाली शाहपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के अनुसार, शाहपुर थाना 1980 में बना। तब से 2006 तक वहां नौ लोगों की मौत हो चुकी है। थाने के निर्माण में छत की शटरिंग गिरने के दौरान कई मजदूर घायल हो गए थे। इसमें तीन की मौत हो गई थी। थाना बनकर तैयार हो गया फिर भी मौतों का सिलसिला जारी रहा। ज्यादा बवाल तीन मौतों को लेकर हुआ था।
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कोतवाली शाहपुर।
- फोटो : अमर उजाला।
31 जनवरी 2001 को राजेश शर्मा नाम के एक व्यक्ति की पिटाई के बाद लॉकअप में मौत हो गई थी। तत्कालीन थानेदार संजय सिंह के साथ ही तीन सिपाहियों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था। शाहपुर थाने के लॉकअप में वर्ष 2006 के बाद से ही कोई बंद नहीं किया जाता है। अनहोनी से बचने के लिए थाने में ही हनुमान मंदिर का भी निर्माण कराया गया है।