उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मंडल में लगभग सभी नदियों का जलस्तर नीचे की तरफ आ रहा है। एक मात्र राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 74 सेमी ऊपर स्थिर है। हालांकि अधिकतर नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। वहीं ग्रामीण बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। आलम यह है कि नदियों का पानी अब गांवों के संपर्क मार्गों पर बह रहा है जिससे आवागमन बाधित हो रहा है।
गोरखपुर मंडल में कई नदियां बह रही हैं खतरे के निशान के ऊपर, 80 गांव बाढ़ से प्रभावित, देखें तस्वीरें
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर आने की वजह से तबाही मची थी। बांधों पर दबाव काफी बढ़ गया था। अब उसका जलस्तर कई दिनों से नीचे की तरफ आना शुरू हुआ है। यही हाल राप्ती का रहा। इसके तटवर्ती क्षेत्रों में पानी का काफी दबाव रहा। इसका जलस्तर घट और बढ़ रहा है।
गुरुवार को राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान से 74 सेमी ऊपर आकर रुका रहा। कुआनो और रोहिन खतरे के निशान से नीचे आ गई हैं जबकि गोर्रा पिड़रा घाट पर अब भी खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर बह रही है।
गुरुवार को नदियों का जलस्तर
घाघरा अयोध्या में सुबह 93-230 शाम को 93-0160 खतरे का निशान 92-730
राप्ती नदी बर्डघाट में सुबह शाम दोनों समय 75-820 पर स्थिर रहा।
कुआनो मुखलिसपुर में सुबह 78-310, शाम को 78-260, खतरे का निशान 78-650
रोहिन तिनमुहानी घाट पर सुबह 82-360, शाम को 82-240, खतरे का निशान 82-440
गोर्रा पिड़रा घाट सुबह 71-280, शाम को 71-200, खतरे का निशान 70-500
41 राहत शिविर चिह्नित
गोरखपुर जनपद में बाढ़ से 80 गांव प्रभावित हैं। उनमें से 21 मैरुंड घोषित किए गए हैं। प्रशासन की तरफ से कोविड 19 के प्रोटोकॉल के तहत 41 राहत शिविर चिह्नित किए गए हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों में गुरुवार को 2531 राहत किट का वितरण किया गया। एक किट में पांच परिवार के लिए 10 दिन की खाद्य सामग्री शामिल है।