पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश न होने से गोरखपुर की ज्यादातर नदियों का जलस्तर शनिवार को नीचे रहा। हालांकि बाढ़ और बांधों के कटान का खतरा बरकरार है। नदियों का पानी जब कम होता है तो कटान की समस्या रहती है। इन सबके बीच जिले की 76,161 की आबादी बाढ़ से घिरी है जबकि 6643-68 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों को नुकसान हुआ है।
गोरखपुर में बाढ़ के पानी से घिरी 76 हजार से ज्यादा की आबादी, राप्ती नदी अब भी बह रही खतरे के निशान से ऊपर
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश नहीं हो रही है। इस वजह से घाघरा नदी खतरे के निशान से नीचे आ गई। पिछले दिनों इसका जलस्तर खतरे के निशान से करीब एक मीटर ज्यादा था। राप्ती का जलस्तर भी कम हुआ है लेकिन नदी अब भी खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इसी का नतीजा है कि बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 114 हो गई है।
शनिवार को दो और गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया। इससे पहले 112 गांव बाढ़ की चपेट में थे। 45 गांव पूरी तरह बाढ़ के पानी से घिरे हैं। इन गांवों से तहसीलों का संपर्क टूट गया है। अब नाव ही आने-जाने का साधन है।
केंद्रीय जल आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक शनिवार की शाम तक राप्ती और गोर्रा को छोड़ सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे आ गईं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं की जानकारी डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने भी ली। कहा कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
शनिवार की शाम तक नदियों का जलस्तर (सेंटीमीटर में)
नदी खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा (अयोध्या) 92.730 92.750 92.670
राप्ती (बर्डघाट) 74.980 75.490 75.410
कुआनो (मुखलिसपुर) 78.650 78.090 78.030
रोहिन (त्रिमुहानी) 82.440 81.270 81.030
गोर्रा (पिड़राघाट) 70.500 71.050 70.950
वाल्मीकि नगर बैराज पर शनिवार की शाम गंडक का डिस्चार्ज 144800 था।