गोरखपुर में एक ऐसी खतरनाक प्रेम कहानी सामने आई है जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहां प्यार को पाने के लिए एक ऐसी साजिश की गई, जिसकी जद में आकर एक महिला की जिंदगी खत्म हो गई, तो उसकी मासूम बच्ची भी अनाथ हो गई। इसके बाद भी मोहब्बत परवान न चढ़ सकी। बात 11 जून 2011 की है। गोरखपुर सिंघाड़िया में एक युवती की लाश मिली थी। उसकी कद काठी और उम्र कुछ वैसी थी, जैसी इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से गायब युवती शिखा दुबे थी। उसके पिता को बुलाया गया, घरवाले, रिश्तेदार भी जुटे सबने माना लाश शिखा की ही है।
मोहब्बत, कत्ल और फिर जेल, इस खूनी लव स्टोरी में हुआ था खतरनाक 'खेल', जानिए कैसे हुआ इसका अंत
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पिता राम प्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर हत्या की आशंका जताई और केस दर्ज करा दिया। पुलिस और मीडिया ने घटना को नाम शिखा दुबे हत्याकांड रख दिया। पुलिस को जांच के दौरान खबर मिली कि आरोपी दीपू सोनभद्र में है। सोनभद्र पहुंचकर पुलिस टीम के सामने एक हैरान करने वाला सच दिखा। वहां केवल दीपू ही नहीं शिखा भी मौजूद थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पूछताछ में शिखा ने बताया कि गोरखपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी में शिखा (23) को पड़ोसी दीपू (26) से प्यार हो गया था। कहने को तो यह मोहब्बत थी, मगर विधि अपना विधान पूरा करने की भूमिका रच रही थी।
विधि का जाल बिछ चुका था, दीपू और शिखा, घर से भागने और परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। दोनों ने तय किया कि शिखा की कद काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश में दीपू का दोस्त सुग्रीव (35) भी शामिल था जो ट्रांसपोर्ट कारोबार था। उसका अक्सर सोनभद्र जिले जाना होता था, वहां वह एक ऐसी लड़की को जानता था, जो कद-काठी में शिखा से बहुत मिलती थी। उसका नाम पूजा (25) था। पूजा तीन साल की बच्ची की मां थी। दीपू और सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी के बहाने ले आए।
सुग्रीव 10 जून की रात में पूजा को ट्रक से कूड़ाघाट लाया और उधर, शिखा- दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वह कपड़ा पहना दिए, जिसे पहनकर वह घर से निकली थी। इतना ही नहीं उसके गले में एक धागा डाला गया जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई।
इस कत्ल में ट्रक का खलासी बलराम भी चंद रुपये के लालच में शामिल हो गया। हत्या के बाद सबने पूजा की लाश का चेहरा धारदार हथियार से इस कदर बिगाड़ दिया कि चेहरे से असल की पहचान ना हो सके। फिर सिंघड़िया के पास लाकर शव को फेंक दिया गया। इस हत्या का आरोपी बनाते हुए पुलिस ने शिखा और दीपू को जेल भेज दिया, बाद में दोनों जमानत पर रिहा हो गए और जेल से बाहर के आने के बाद दोनों अलग-अलग शादी करके अपनी एक अलग ही दुनिया बसा लिए हैं। फिलहाल केस अदालत में अभी भी चल रहा है।
(यह कहानी आरोप पत्र और विभिन्न किरदारों के परिवारों से मिली जानकारी के आधार पर है।)