उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिला प्रशासन ने धनतेरस-दिवाली के मद्देनजर जाम न लगे, इसके लिए रूट डायवर्जन के इंतजाम किए। बाकायदा इसे लागू भी किया गया। लेकिन प्रशासन का दावा तब फेल हो गया जहां इंतजाम हुए थे, उन्हीं स्थानों पर लोग जाम में जूझते नजर आए। भीड़ में शहरवासी ऐसे फंसे कि खरीदारी के बजाए घर की ओर रुख करना उन्हें ज्यादा ठीक लगा। देवरिया बाईपास तिराहा से नौसड़ तक भीषण जाम लगा रहा। भीड़ में फंसे लोगों के मिनटों का सफर घंटों में बदल गया।
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जो लोग खरीदारी को निकले थे, बगैर कुछ लिए घरों को लौटे।
- फोटो : अमर उजाला।
प्रशासन की ओर से 11 नवंबर से 14 नवंबर तक कई मार्गों पर रूट परिवर्तित किए गए हैं। इनमें कुछ स्थानों पर तो चार पहिया, ऑटो और रिक्शा के चलने पर भी पाबंदी लगाई गई है। बावजूद इसके लोग जाम में कुछ ऐसे फंस गए कि उन्हें घर लौटना ही ज्यादा मुनासिब लगने लगा।
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देवरिया बाईपास के पास लगा जाम।
- फोटो : अमर उजाला
देवरिया बाईपास तिराहा से नौसड़ तक जाम के दौरान व्यवस्था फेल दिखी। मियां बाजार निवासी रत्नेश दुकान से जब चले थे तो इरादा किया था कि घर से खाना खाकर लौट आएंगे। मगर घोष कंपनी के पास जाम में ऐसे फंसे कि चार सौ मीटर की दूरी एक घंटे में भी तय नहीं कर सके। उन्होंने वापस दुकान जाने में ही भलाई समझी।
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गोरखपुर में लगा जाम।
- फोटो : अमर उजाला।
कुछ ऐसा ही अनुभव राप्तीनगर के शिव कुमार का भी रहा। वह बच्चों की फरमाइश पर झालर खरीदने के लिए कार लेकर निकल पड़े। पार्किंग स्थल कचहरी बनाया गया था लेकिन देखा कि कोई पुलिस वाला रोक नहीं रहा तो वह भी कार लेकर आगे बढ़ गए और फिर तीन घंटे जाम में फंसने के बाद बिना झालर खरीदे ही घर लौट आए। देवरिया बाईपास से नौसड़ तक का सफर तय करने वाले लोग हों या फिर विजय चौक से अलीनगर, चहुंओर जाम में लोग जूझते नजर आए।
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गोरखपुर में लगा जाम।
- फोटो : अमर उजाला।
गोलघर से असुरन जाने वाले लोगों को भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। लोग जाम से बचने के लिए गलियों में गए तो वहां पर उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। यातायात नियंत्रण के लिए बनाई गई सारी योजनाएं ध्वस्त होने के कारण पुलिसकर्मी भी हांफते नजर आए।