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इन लोगों के लिए जीवन का बेहतरीन वक्त है लॉकडाउन, अपने हर पल को ऐसे बना रहे हैं यादगार

Sun, 03 May 2020 04:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 03 May 2020 04:30 PM IST
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Golden chance to spend time with family for TTE During lockdown in gorakhpur
लंबे समय बाद टीटीई को घर के लोगों के साथ वक्त गुजारने का मिल रहा मौका। - फोटो : अमर उजाला।
रेलवे के टीटीई की नौकरी करने वालों की कोई निश्चित दिनचर्या नहीं होती। सब कुछ ट्रेन के आने-जाने के समय के अनुसार तय होता है। कभी शाम को घर पहुंचने का वादा करके निकलते हैं और ट्रेन लेट होने पर रात हो जाती है। समय के अभाव में जिंदगी में भागमभाग रहती है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान ट्रेनों का संचालन रुकने से टीटीई को घर के लिए भरपूर समय मिल रहा है। वे बदली हुई दिनचर्या का आनंद भी खूब उठा रहे हैं। 
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टीटीई विवेक सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
पत्नी के कामकाज में हाथ बंटाता हूं
टीटीई विवेक सिंह ने बताया कि घर पर पिता, पत्नी और बच्चों को भरपूर समय दे रहा हूं। पत्नी के कामकाज में भी हाथ बंटाता हूं। कभी-कभी किचन संभालने के साथ मनपसंद डिश बना देता हूं। वैसे सब्जी को खरीद कर घर लाने के बाद उसको  साफ करने की जिम्मेदारी भी मेरी है।
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बच्चों की पढ़ाई में मदद करते टीटीई जेपी सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
बच्चों की पढ़ाई में मदद करता हूं
टीटीई जेपी सिंह ने बताया कि घर पर हूं तो ज्यादा समय बच्चों को ही दे रहा हूं। सुबह उनकी ऑनलाइन क्लास चलती है तो उसमें मदद करता हूं। इसके बाद उनके साथ खूब खेलता हूं। घर पर खूब अच्छे पकवान भी खाने को मिल रहे हैं, नहीं तो ड्यूटी के दौरान तो समय ही नहीं बच पाता है।
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पौधों की सिंचाई करते टीटीई रोहित शुक्ला। - फोटो : अमर उजाला।
पति-पत्नी दोनों को मिली राहत
टीटीई रोहित शुक्ला ने बताया कि मैं तो ज्यादा समय बागवानी को ही दे रहा हूं। फूल-पत्तियों के बीच समय गुजारना बहुत अच्छा लग रहा है। पत्नी वंदना भी रेल कर्मचारी हैं तो दोनों लोग घर पर समय नहीं दे पाते हैं। हमारे लिए तो लॉकडाउन जीवन का बेहतरीन वक्त है।
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फूल के पौधे की देखरेख करते डिप्टी सीटी मनोज द्विवेदी। - फोटो : अमर उजाला।
26 साल की नौकरी में ऐसा वक्त नहीं आया
डिप्टी सीटी मनोज द्विवेदी ने बताया कि 26 साल नौकरी करते हो गए हैं। मुझे याद नहीं है कि कभी इस तरह परिवार को समय दे पाया हूं। नौकरी ऐसी है कि कब घर पहुंच पाऊंगा, यह तय नहीं होता। समय का पूरा उपयोग कर रहा हूं। बच्चों के साथ लूडो, कैरम खेल लेता हूं। इसके बाद बागवानी में समय देता हूं।
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