कोरोना मरीजों की जान बचाने में उपयोगी साबित हो रहा स्टीरॉयड बिना सोचे समझे उपयोग करने पर घातक भी हो सकता है। इसे इमरजेंसी दवा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि इलाज के लिए चिकित्सक के पास पहुंचा जा सके। यह कहना है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा का। उनके मुताबिक कोरोना मरीज पर स्टीरॉयड का इस्तेमाल विशेष हालात में किया जाता है सामान्य हालात में नहीं। कोरोना महामारी में संक्रमित होने के डर से अस्पताल और चिकित्सकों के यहां लंबी लाइन लगाने से बच रहे हैं। ऐसे में बहुत से लोग चिकित्सकों के परामर्श के बिना या फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे नुस्खे इस्तेमाल कर रहे हैं। इन नुस्खों में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए डेक्सामेथासोन, मेडरॉल, प्रेडमेट, जेमप्रेड, मेप्रेड आदि नाम की दवाएं भी उपयोग के लिए बताई जा रही हैं। यह दवाएं स्टीरॉयड हैं।
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डॉ. अश्वनी मिश्रा।
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डॉ. अश्वनी मिश्रा कहते हैं कि इन दवाओं के बिना सोचे समझे प्रयोग करने से कोरोना संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। उनके अनुसार कोविड संक्रमित मरीजों में 80 फीसदी को दवा की जरूरत नही होती। सिर्फ दस से पंद्रह फीसदी मरीजों को ही ऑक्सीजन स्तर की जांच और दवाओं की जरूरत पड़ती है।
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उन्होंने कहा कि लोगों को दवाओं के बारे में अधूरी या गलत जानकारी होती है। पीजीआई चंडीगढ़ की केस हिस्ट्री का हवाला देते हुए बताया कि मई मरीज एंटीवायरल दवाएं और स्टीरॉयड बिना चिकित्सक के परामर्श के ले रहे थे। इसके बाद उनकी बीमारी और बढ़ गई।
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स्टडी में आया कि स्टीरॉयड के इस्तेमाल से शरीर में वायरस की एक्टिविटी बढ़ृ गई थी। उनके अनुसार इस्टीरॉयड का इस्तेमाल इमरजेंसी में ही किया जाना चाहिए, अगर इसे शुरुआती चरण में दिया जाए तो यह वायरस से होने वाले नुकसान को और भी ज्यादा बढ़ा सकता है।
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डॉ. मिश्रा की सलाह है कि स्टीरॉयड का इस्तेमाल तब तक नहीं करना चाहिए जब तक मरीज की सांस नहीं फूलने लगे और ऑक्सीजन स्तर 92 के नीचे आ जाए। ऐसी हालत में डेक्सामेथासोन छह एमजी की एक गोली मरीज को देनी चाहिए। इसके बाद तुरंत मरीज को अस्पताल पहुंचाएं या चिकित्सक से सलाह लें, इस दवा का लगातार इस्तेमाल करने से परहेज करें।