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Exclusive: पूर्वांचल की बेटियों को जर्म सेल ट्यूमर का खतरा, विशेषज्ञ बोले- समय पर नहीं हुआ इलाज तो जा सकती है जान
Sat, 18 Dec 2021 02:05 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र , गोरखपुर।
नीरज मिश्र , गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 18 Dec 2021 02:05 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
पूर्वांचल की बेटियों में जर्म सेल ट्यूमर का खतरा बढ़ता जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार के शोध में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है। तीन अलग-अलग आयु वर्ग की 133 बच्चियों, युवतियों और महिलाओं के समूह पर शोध किया था। चिंता की बात यह है कि बड़ी उम्र की महिलाओं में होने वाला जर्म सेल ट्यूमर, पहली बार आठ से 15 वर्ष की बेटियों में भी मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही समय पर जर्म सेल ट्यूमर का इलाज न हो तो छह माह में प्रभावित की जान जा सकती है।
डॉ. अवनीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला।
चिंता की बात है कि 8 से 15 वर्ष तक की 16 बच्चियों और किशोरियों में जर्म सेल ट्यूमर मिले हैं। इसके अलावा 15 से 60 वर्ष की किशोरियों व महिलाओं में ओवेरियन, जर्म सेल और एपिथेलिअल ट्यूमर मिले हैं। जर्म सेल ट्यूमर जिन बच्चियों में मिले हैं, उनके मासिक चक्र अनियमित पाए गए। इसके अलावा उनके पेट में दर्द, पेशाब का रुक-रुक कर आना और लगातार कब्ज की शिकायत थी। जबकि ओवेरियन और एपिथेलिअल ट्यूमर के मरीजों के मासिक चक्र में अनियमितता मिली है।
जर्म सेल ट्यूमर से चली जाती है जान
डॉ अवनीश कुमार ने बताया कि अगर सही समय पर जर्म सेल ट्यूमर से पीड़ित का इलाज न हो तो उसकी जान जा सकती है। जर्म सेल ट्यूमर बेहद खतरनाक होता है। अगर किसी तरह बेटियां बच भी जातीं तो उन्हें शादी के बाद काफी शारीरिक दिक्कतें झेलनी पड़तीं। वह मां तक नहीं बन पातीं या वह कैंसर का शिकार हो जातीं। युवतियों और महिलाओं में होने वाले ओवरियन ट्यूमर और जर्म सेल ट्यूमर का सही समय पर इलाज होने से कैंसर से बचा जा सकता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
शोध हो चुका है प्रकाशित
डॉ अवनीश कुमार ने बताया कि ट्यूमर पर हुए शोध का प्रकाशन ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ गायनोलोजिकल ऑर्गेनाइजेशन में जनवरी 2021 में प्रकाशित हो चुका है। शोध में बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉक्टरों का भी विशेष सहयोग रहा है।पांच सेंटीमीटर से बड़ा ट्यूमर खतरनाक
डॉ अवनीश कुमार ने बताया कि पांच सेंटीमीटर से बड़ा ट्यूमर ज्यादा खतरनाक है। जिन बेटियों में जर्म सेल ट्यूमर मिले हैं, उनकी साइज 10 से 15 सेंटीमीटर रही है। इसकी जानकारी भी उन्हें सही समय पर नहीं हो पाई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
ओटी में हर दूसरा केस ट्यूमर का
डॉ अवनीश कुमार ने बताया कि ट्यूमर के मामले बढ़ने की वजह से ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में हर दूसरे केस ट्यूमर के आ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं और युवतियों को सलाह दी जा रही है कि जब पेट बढ़ता हुआ दिखे, लगातार एसिडिटी, कब्ज से परेशानी और पेशाब रुक-रुक कर आए तो तत्काल जांच कराएं। अगर इसमें लापरवाही करेंगी तो जानलेवा साबित हो सकती है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ अवनीश।
- फोटो : अमर उजाला।