गोरखपुर शहर के झरना टोला में रहने वाले अधिवक्ता अभिषेक सिंह को बागवानी की प्रेरणा अपने पिता आरपीएफ के रिटायर्ड कमांडर व्यास मुनी सिंह और मां कलावती देवी से मिली है। अभिषेक की पिछले पांच वर्षों की मेहनत का नतीजा सात हजार स्क्वायर फीट में फैली बगिया में नजर आता है। बगिया में आम, लीची, आंवला, मौसमी, संतरा, नींबू, पपीता, अनार, शरीफा, नाशपाती, अमरूद, नारियल और अंगूर के पेड़ हैं। सजावटी पौधों में अल्मांडा, क्रोटन, सरकुलेंट्स, हेज तो फूलों में गुड़हल, रातरानी, समेत कई पौधे हैं। औषधीय पौधों में गिलोय, तुलसी, पुदीना, इलायची और तेजपत्ता भी मौजूद हैं।
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गुलाब, गुड़हल, गेंदा से महकती है चंद्रकला की बगिया।
- फोटो : अमर उजाला।
गीता वाटिका स्थित वसंत बिहार कॉलोनी की चंद्रकला पोद्दार ने घर के 500 स्क्वायर फीट एरिया में गार्डन तैयार किया है। सैकड़ों गमलों में लगे पौधे भी घर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। पति रिटायर्ड यूनियन बैंक मैनेजर गोपाल पोद्दार और पौत्र कौस्तुभ भी चंद्रकला का बखूबी हाथ बटाते हैं। ट्यूब रोज, कश्मीरी रोज, सदा सुहागन, चांदनी, तुलसी, गुड़हल, गेंदा, रजनीगंधा आदि की महक पूरे घर को सुवासित करती है।
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30 साल से बागवानी का आनंद ले रहे विनोद।
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गीता प्रेस रोड पर मौजूद दीपशिखा साड़ी के संचालक विनोद शंकर बरनवाल 30 साल से अपने घर की बगिया को संवार रहे हैं। उन्होंने एक हजार स्क्वायर फीट के टेरेस को गार्डन के रूप में विकसित किया है। सीमेंटेड क्यारियां और 200 से अधिक गमलों हर मौसम में गुलजार रहते हैं। विनोद शंकर रोजना एक घंटे का समय अपने पौधों को देते हैं। बगिया में सजावटी पौधों में एलोवेरा, गिलोय, स्नेक प्लांट, कैक्टस, शमी, तुलसी, मीठी नीम, अशोक और मनी प्लांट की कई प्रजातियां हैं। फूलों में गुलदाउदी, डहेलिया, बेला, गेंदा, सूरजमुखी, जिनिय गार्डन की शोभा को बढ़ाते हैं।
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बचपन के शौक को पूरा कर रहीं अपराजिता।
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अपराजिता चौधरी को बागवानी का शौक बचपन से रहा है। घंटाघर स्थित घर में उन्होंने 3000 स्क्वायर फीट का गार्डन तैयार किया है। पौधों की देखरेख के लिए रोजाना दो घंटे का समय निकालती हैं। उन्होंने कई देसी और विदेशी फूलों के पौधे लगाए हैं। पति पावस चौधरी, बेटी मानविका और सास शैल चौधरी भी उनका सहयोग करती हैं।
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हरियाली की अलख जगा रहे शिक्षक विनोद
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नौसड़ के जवाहर चक में रहने वाले सरकारी शिक्षक विनोद कुमार शिक्षा के साथ आसपास के लोगों में भी हरियाली की अलख जगा रहे हैं। उनके गार्डन में गुलाब, लिली, कनईल, मधुमालती, बोगनवेलिया, रातरानी, चमेली, गंधराज और चंपा सुगंध बिखेरेते हैं। औषधीय पौधों में सहजन, हरशृंगार, आंवला, नींबू, नीम, केला और अमरूद के पौधे लगा रखे हैं। गार्डन में हरी सब्जियां भी उगाते हैं।