लोग हाथी पालते रहे। हाथी बिदक कर लोगों की जान लेते रहे। वन विभाग मूकदर्शक बना रहा। वन विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होने की वजह से बृहस्पतिवार को तीन लोगों की जिंदगी एक पगलाए हाथी ने रौंद डाली। इसमें दो महिलाएं और एक मासूम शामिल हैं।
गजराज के तांडव से तीन की मौत: वन विभाग को पता ही नहीं, लोग पाल रहे हाथी और जा रही है लोगों की जान
जानकारी के अनुसार, जिले में इस समय 10 से अधिक लोगों ने हाथी पाल रखे हैं, लेकिन लाइसेंस किसी के पास नहीं है। पालतू हाथी का पंजीकरण नहीं होने से यह पता नहीं चल पाता है कि उत्पात मचाने वाला हाथी किसका है? जिसका होता है वह इन्कार करके बच निकलता है। यही नहीं पालतू हाथी के स्वास्थ्य की नियमित जांच नहीं होने की वजह से ही हादसे होते हैं। यदि पालतू हाथी की सेहत की नियमित जांच हो तो उसके मानसिक हालात का भी पता चल सके। ऐसे में समय रहते उसका इलाज करके जंगल में छोड़ा जा सकता है।
हाथी के बिदकने से होने वाली घटनाओं के बाद वन विभाग की सक्रियता सवालों के घेरे में होती है। साल 2020 में एक जनप्रतिनिधि के हाथी ने अपने महावत को पटककर मार डाला था। इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह भी नहीं पता किया गया कि हाथी का पंजीकरण कराया गया था या नहीं? उसके स्वास्थ्य की नियमित जांच होती थी कि नहीं?
पंजीकरण हो तो जांची जाए सेहत, तब न हों हादसे
नियमानुसार हाथी पालने वाले को वन विभाग में पंजीकरण कराना जरूरी होता है, ताकी विभाग की ओर से पशु डॉक्टर उसकी समय-समय पर जांच कर सकें। लेकिन, न तो वन विभाग की ओर से हाथी पालकों से संपर्क करने की कोशिश की जाती है। न खुद हाथी पालने के शौकीन लोग वन विभाग से संपर्क करते हैं। हादसा होने के बाद नाम उजागर होने पर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
नोटिस जारी कर भूल गए
जनप्रतिनिधि के हाथी ने जब महावत को जान से मारा था तो तत्कालीन डीएफओ अविनाश कुमार ने नौ लोगों को नोटिस भेजा था। बाद में इसमें क्या हुआ किसी को पता नहीं चला। इस तरह नोटिस भेजकर वन विभाग के अधिकारी खानापूर्ति कर लेते हैं।
वन विभाग कर सकता है कार्रवाई
अगर जिले में हाथी है और उसका पंजीकरण वन विभाग में नहीं है तो वन विभाग कार्रवाई कर सकता है। लेकिन कोई कार्रवाई करने के लिए वन विभाग को हाथी रखने वालों की सूची बनानी होगी। इसके बाद पंजीकरण नहीं करने वालों के खिलाफ न्यायालय में अर्जी देनी होगी। फिर अदालत के अदेशानुसार कार्रवाई करनी होगी।
हाथी पालने के नियम
हाथी पालने के लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डेन से एनओसी लेनी होती है। इसके लिए हाथी पालने वाले को आवेदन करना होता है। फिर वन विभाग की टीम जांच कर एनओसी और लाइसेंस देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है। पालने का लाइसेंस नहीं होने पर हाथी को न्यायालय के माध्यम से जब्त किया जा सकता है। स्वाथ्य की नियमित जांच में यदि हाथी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होती है तो उसे जंगल में छोड़ दिया जाता है।