देवरिया जिले में सरयू नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे से स्थिर है। नदी खतरे के निशान से 45 सेमी ऊपर बह रही है। तुर्तीपार रेगुलेटर पर नदी बुधवार दोपहर तीन बजे 64 मीटर 42 सेमी पर बह रही थी। नदी अब भी खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर है। तुर्तीपार रेगुलेटर पर खतरे का निशान 64.30 मीटर है। नदी में आई बाढ़ से भदिला प्रथम गांव चारों ओर से पानी से घिर गया है। लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तटवर्ती गांवों के लोगों की सांसें अटकी हुई हैं।
देवरिया में बाढ़: सरयू नदी का थमा जलस्तर, इस वजह से अटकी हुई हैं ग्रामीणों की सांसें
नदी के जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि के कारण सरयू थाना घाट पर सिंचाई विभाग के गेज पर खतरे के निशान 66.50 से 45 सेमी ऊपर 66.95 पर बह रही है।
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प्रशासन किसी भी विषम स्थिति से निपटने के लिए मुस्तैद है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 12 बाढ़ चौकियों को अलर्ट पर रखते हुए नाविकों और गोताखोरों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। सरयू नदी का पानी तेजी से गांवों की ओर बढ़ रहा है। सहायक अभियंता अशोक द्विवेदी ने बताया कि जलस्तर थमा है। हालात काबू में हैं।
पालिका ने स्नानार्थियों के लिए नदी घाट पर बंधवाई रस्सी
सरयू नदी पिछले 10 दिनों से उफान पर है। जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी के रौद्र रुप अख्तियार करने से घाट की सीढ़ियां डूब गई हैं। नदी की धारा तेज है। इसको देखते हुए एसडीएम न्यायिक सुनील कुमार सिंह और नपा चेयरमैन उमाशंकर सिंह विशेन के निर्देश पर पालिका कर्मियों ने थाना, आरती, परशुराम, सीता सहित अन्य घाटों पर स्नान के लिए एक निश्चित सीमा रेखा तय करते हुए रस्सी बंधवाई है, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोग रस्सी के सहारे स्नान कर सकें।
नदियों का जलस्तर घटा, बंधों पर कटान तेज
रुद्रपुर क्षेत्र की गोर्रा और राप्ती नदियों का जलस्तर घटने के साथ कटान शुरू हो गया है। बंधों पर तेजी से कटान को देख तटवर्ती गांव के लोग दहशत में आ गए। बारिश से सलसलाएं बंधे कटान होने पर नदी की तरफ झुकने लगे है। बंधों पर जगह जगह बने रैट होल से सिंचाई विभाग की मुसीबत बढ़ी है। मंगलवार की शाम राप्ती नदी 69.05 मीटर और गोर्रा नदी 69.40 मीटर पर बह रही थी, जबकि बुधवार को राप्ती नदी करीब बीस सेमी और गोर्रा 25 सेमी घट गई। नदियों का जलस्तर घटने के साथ बंधे पर दबाव तेज हो गया। बंधे कट कट कर नदी में गिर रहे है।
पिड़री गांव के समीप गोर्रा नदी के कटान को रोकने के लिए लगाए बोल्डर पिचिंग नदी में धसक रहे है। सिलहटा गांव के समीप गोर्रा नदी करीब दस बीघा तक कटान करते हुए आबादी की तरफ तेजी से बढ़ रही है। गोर्रा नदी के किनारे हो रहा पायलट प्रोजेक्ट कार्य बारिश और नदी के जलस्तर में बढोतरी के कारण ठप पड़ा है। नदी और बंधे के बीच बसे बहोरा दलपतपुर और नरायनपुर की मकाने इस बार भी नदी में विलीन होने के कागार पर है। दोआबा के सबसे लंबे तिघरा मराछी बांध पर एक दर्जन जगहों पर राप्ती नदी कटान कर रही है। तिघरा गांव के समीप रिटायर बंधे को नदी अपने आगोश में लेकर नए बंधे के समीप तक पहुंच रही है। गायघाट और केवटलिया गांव के समीप कटान से ग्रामीणों में भय बना है। इस बाबत एसडीओ दीन दयाल दूबे ने कहा कि नदियों का जलस्तर घटा है। कुछ स्थानों पर जलस्तर घटने से कटान हो रहा है। बंधों की सुरक्षा की जा रही है।