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Exclusive: अंगुलियों की लकीरों से पता चलेगी नपुंसकता, जानिए कैसे हुआ खुलासा
Wed, 18 Aug 2021 10:27 AM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र , गोरखपुर।
नीरज मिश्र , गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 18 Aug 2021 10:27 AM IST
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अंगुलियों की छाप व डॉ. बिंदु सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
पुरुषों की अंगुलियों में अगर लूप और वर्ल ज्यादा हैं तो उन्हें नपुंसकता का खतरा हो सकता है। ऐसे व्यक्ति ओलिगोस्पर्मिया (शुक्राणु कम होना) के शिकार हो सकते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के शोध में यह बात सामने आई है। 50 पुरुषों पर हुए शोध में 25 सामान्य और 25 मरीजों को शामिल किया गया है। मरीजों के स्पर्म (शुक्राणु) सामान्य व्यक्तियों के शुक्राणु से 50 प्रतिशत कम पाए गए। ऐसे मरीजों को विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि समय पर जांच कराएं, वरना वह पिता नहीं बन सकते हैं।
डॉ. बिंदु सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
अंगूठे और तर्जनी की रेखाओं में मिला अंतर
डॉ. बिंदु सिंह ने बताया कि अंगूठे और तर्जनी में पांच-पांच रेखाओं का अंतर मिला है। सामान्य व्यक्तियों के दाहिने हाथ के थंब में जहां 13 रिज (रेखाएं ) पाई गईं वहीं मरीजों में 18 रिज पाए गए हैं। इसी तरह बाएं हाथ की तर्जनी में सामान्य मरीजों में 11 रेखाएं मिली हैं, जबकि मरीजों में 15 रेखाएं पाई गईं।
डॉ. बिंदु सिंह ने बताया कि अंगूठे और तर्जनी में पांच-पांच रेखाओं का अंतर मिला है। सामान्य व्यक्तियों के दाहिने हाथ के थंब में जहां 13 रिज (रेखाएं ) पाई गईं वहीं मरीजों में 18 रिज पाए गए हैं। इसी तरह बाएं हाथ की तर्जनी में सामान्य मरीजों में 11 रेखाएं मिली हैं, जबकि मरीजों में 15 रेखाएं पाई गईं।
अंगुलियों की छाप।
- फोटो : अमर उजाला।
जिनमें रेखाएं ज्यादा मिलीं उनमें स्पर्म बेहद कम
जिन मरीजों में रिज कम मिले हैं, उनके स्पर्म की जांच की गई तो पता चला कि उनके अंदर सामान्य मरीजों की तुलना में 50 प्रतिशत स्पर्म कम मिले हैं। एक एमएल स्पर्म में 35 मिलियन से लेकर 200 मिलियन तक शुक्राणु सामान्य व्यक्तियों में पाए गए, जबकि मरीजों में यह संख्या 20 मिलियन से कम रहीं। ऐसे मरीज पिता नहीं बन सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत है।
जिन मरीजों में रिज कम मिले हैं, उनके स्पर्म की जांच की गई तो पता चला कि उनके अंदर सामान्य मरीजों की तुलना में 50 प्रतिशत स्पर्म कम मिले हैं। एक एमएल स्पर्म में 35 मिलियन से लेकर 200 मिलियन तक शुक्राणु सामान्य व्यक्तियों में पाए गए, जबकि मरीजों में यह संख्या 20 मिलियन से कम रहीं। ऐसे मरीज पिता नहीं बन सकते हैं। ऐसे मरीजों को तत्काल इलाज की जरूरत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
रेखाएं गर्भ में ही बन जाती हैं
डॉ. बिंदु बताती हैं कि अंगुलियों की रेखाएं गर्भ में ही बन जाती हैं। यह पूरे जीवन में कभी बदलती नहीं है। इनमें बदलाव तभी संभव है जब हाथ जल जाए या फिर हाथों में कोई गंभीर बीमारी हो जाए। तभी कुछ रेखाएं बदलती हैं। इसके अलावा कोई भी रेखाएं कभी नहीं बदलती हैं।
डॉ. बिंदु बताती हैं कि अंगुलियों की रेखाएं गर्भ में ही बन जाती हैं। यह पूरे जीवन में कभी बदलती नहीं है। इनमें बदलाव तभी संभव है जब हाथ जल जाए या फिर हाथों में कोई गंभीर बीमारी हो जाए। तभी कुछ रेखाएं बदलती हैं। इसके अलावा कोई भी रेखाएं कभी नहीं बदलती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
चार रेखाएं महत्वपूर्ण
आर्च लूप- रेखाएं टीले जैसी आकृति बनाती हैं।
वर्ल लूप- रेखाएं भंवर जैसी आकृति बनाती हैं।
लूप- रेखाओं का झुकाव सबसे छोटी अंगुली (कनिष्ठा) की तरफ होता हैं।
रेडियल लूप- रेखाओं का झुकाव अंगूठे की तरफ होता हैं।
फिंगर रिज काउंट (एफआरसी)
दायां हाथ बायां हाथ
आर्च लूप- रेखाएं टीले जैसी आकृति बनाती हैं।
वर्ल लूप- रेखाएं भंवर जैसी आकृति बनाती हैं।
लूप- रेखाओं का झुकाव सबसे छोटी अंगुली (कनिष्ठा) की तरफ होता हैं।
रेडियल लूप- रेखाओं का झुकाव अंगूठे की तरफ होता हैं।
फिंगर रिज काउंट (एफआरसी)
दायां हाथ बायां हाथ
| सामान्य | बीमार | सामान्य | बीमार | |
| अंगूठा | 15 | 20 | 13 | 18 |
| तर्जनी | 12 | 13 | 12 | 12 |
| मध्यमा | 12 | 12 | 12 | 12 |
| अनामिका | 12 | 12 | 13 | 14 |
| कनिष्क | 10 | 10 | 11 | 11 |