गोरखपुर जिले के गोला में देवकली गांव में दो बच्चों और पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले इंद्रबहादुर प्रकरण में नया मोड़ आ गया। सोमवार को भतीजे अभिषेक ने पुलिस को तहरीर दे दी। उसका आरोप है कि गांव के सूदखोरों से आजिज आकर पिता ने गांव छोड़ दिया है और अब चाचा इंद्र बहादुर ने अपने बच्चें और पत्नी की हत्या के बाद खुदकुशी कर ली है। उसकी मांग है कि सूदखोरों पर कार्रवाई की जाए। पुलिस ने इस मामले में रविवार को इंद्रबहादुर के साले की तहरीर पर केस दर्ज किया था, लेकिन कल तक दबी जुबान गांव वाले जिस सूदखोरी की चर्चा कर रहे थे, वहीं अब भतीजे ने इसे उजागर कर दिया है।
एक साथ जलीं चार चिताएं: सूदखोरों से तंग होकर पिता ने छोड़ा था गांव, चाचा ने हत्या कर खत्म किया कुनबा
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भतीजे के मुताबिक, इंद्र बहादुर सब्जी का व्यापार करता था। घर के अलावा करीब 4 हजार वर्ग फीट जमीन भी थी। बाकी वह गांव के लोगों से बंटाई पर खेत लेकर सब्जी की खेती करता था। सब्जी को थोक मंडी में बेचता था। पुलिस को दी तहरीर में अभिषेक ने लिखा है कि सूदखोरों से परेशान होकर ही मेरे पिता जय बहादुर मौर्य गांव छोड़कर 3 साल पहले लापता हो गए। मेरे गांव के ही लोगों ने मेरे पिता को सूद पर रुपये दिया था। जिसके ब्याज के एवज में उसने मेरे पिता के हिस्से का खेत और जमीन रजिस्ट्री करा ली। जबकि, उस जमीन का बकाया 15 लाख रुपये भी संदीप ने अब तक नहीं दिया।
आरोप है कि कि इंद्र बहादुर को इसी गांव के ही लोगों ने सूद पर रुपये दिए थे। जिसका ब्याज नहीं चुका पाने पर वह सभी चाचा को प्रताड़ित कर रहे थे। सूदखोर चाहते थे कि पिता की तरह मेरे चाचा भी अपने हिस्से की जमीन और खेत उनके नाम रजिस्ट्री कर दें।
पूरी रात शवों के साथ बैठा रहा, मरहम पट्टी की
पुलिस के मुताबिक, कमरे में जहां लाश मिली। वहां डेटॉल की बोतल, कपड़े पड़े थे, जो डेटॉल से भीगे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में घाव पर डेटॉल लगाए जाने के प्रमाण मिले है। इससे लगता है कि पत्नी और बच्चों का गला रेतने के बाद इंद्रबहादुर ने उन्हें दवाई और मरहम लगाकर बचाने की भी कोशिश की। पुलिस का मानना है कि सुबह नशा उतरने पर जब उसे होश आया होगा तो अपने किए पर पछताया होगा। कुछ समझ नहीं आया तो उसने आग लगाकर खुदकुशी कर ली।
पूरे परिवार के खत्म होने के बाद भी नहीं आया जयबहादुर
इंद्र बहादुर के छोटे भाई जय बहादुर ने अपने हिस्से की करीब 4 हजार वर्ग फीट खेत कर्ज की वजह से गांव के एक व्यक्ति को बेच दिया था। तभी से वह गांव छोड़कर चला गया। दो साल पहले पिता श्याम बिहारी की मौत की सूचना पर भी जय बहादुर घर नहीं आया। लेकिन, गांव वालों के मुताबिक, उसे भाई-भाभी और बच्चों के मौत की सूचना मिली तो घर आने को तैयार हो गया। क्योंकि, उसे पता है कि अब इंद्र बहादुर का परिवार खत्म हो गया और अब प्रॉपर्टी पर उसका हक है। हालांकि, सोमवार को जय बहादुर ने खुद आने की बजाय अपने बेटे को गांव भेज दिया।