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विकास की खुशी अधूरी: लिंक एक्सप्रेस-वे में किसान मिट्टी देने को तैयार नहीं, 9 माह में 40 फीसदी काम होगा कैसे

Mon, 03 Apr 2023 02:21 PM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 03 Apr 2023 02:21 PM IST
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Farmers not ready to give soil for Link Expressway in gorakhpur
लिंक एक्सप्रेस-वे। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से जोड़ने वाले करीब 91 किलोमीटर लंबे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरने के लिए अभी साल से डेढ़ साल तक इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि, कार्यदायी संस्था का दावा है कि इस साल दिसंबर तक मार्ग को तैयार कर दिया जाएगा। लेकिन, सबसे बड़ा और वाजिब सवाल यह है कि जब तीन साल में करीब 60 फीसदी काम हो पाया, तो बचे नौ माह में 40 फीसदी काम कैसे पूरा हो जाएगा ?



कार्यदायी संस्था के अधिकारी बताते हैं कि करीब तीन साल से बन रहे एक्सप्रेस-वे के निर्माण में कई रोड़े हैं। प्रमुख बाधा सड़क बनाने के लिए मिट्टी का नहीं मिल पाना है। किसानों ने अपने खेत से मिट्टी देने से इन्कार कर दिया है। मिट्टी नहीं मिल पाने की वजह से मार्ग बनाने में दिक्कत आ रही है।

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गोरखपुर को आजमगढ़ जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने वाले 91.35 किलोमीटर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य फरवरी 2020 से चल रहा है। करीब 5876.67 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस मार्ग को मार्च 2023 में तैयार हो जाना चाहिए था। कार्यदायी संस्था का कहना है कि कोरोना काल में निर्माण कार्य बंद हो जाने से परियोजना समय से पूरी नहीं हो पाई।

अब दिसंबर 2023 तय इसको हर हाल में बना दिया जाएगा। इनका दावा है कि फिलहाल 62 फीसदी कार्य हो गया है। शेष कार्य को नौ माह में पूरा कर दिया जाएगा।गोरखपुर जिले में अभी सड़क बनाने के लिए मिट्टी डाली जा रही है। इसके बाद की प्रक्रियाएं भी समय लेती हैं। यही वजह है कि लोगों को यकीन नहीं हो रहा है कि इस साल दिसंबर तक लिंक एक्सप्रेस-वे बनकर तैयार हो जाएगा।
 

Farmers not ready to give soil for Link Expressway in gorakhpur
लिंक एक्सप्रेस-वे। - फोटो : अमर उजाला।

लिंक एक्सप्रेस-वे का चार जिलों को होगा सीधा फायदा
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे जब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से मिल जाएगा तो कई जिलों के लोगों का आवागन आसान हो जाएगा। गोरखपुर, संतकबीरनगर, आंबेडकरनगर और आजमगढ़ जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि इन जिलों से ही यह मार्ग गुजरेगा। इसके अलावा इन जिलों के लोगों के लिए वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ आनाजाना आसान हो जाएगा। इससे गोरखपुर और अन्य जिलों के उद्योगों को भी लाभ होगा। सड़क मार्ग से माल आने जाने में कम समय लगेगा और भाड़ा बचेगा। वहीं, जब इस मार्ग के किनारे औद्योगिक गलियारा बन जाएगा, तो रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ विकास को भी पंख लगेंगे। लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) करा रहा है।

गोरखपुर में 45.50 किमी है लंबाई, काफी काम बाकी
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 91.35 किलोमीटर बताई जा रही है। इसमें गोरखपुर जिले में करीब 45.50 किमी लंबाई का एक्सप्रेस-वे बनना है। गोरखपुर में यह मार्ग जैतपुर, खजनी, हरनही, सिकरीगंज, बेलघाट, कम्हरियाघाट और फुलवरिया होते हुए सरयू नदी को पार करेगा। गोरखपुर जिले में यह मार्ग संतकबीरनगर जिले की सीमा को छूता हुआ निकल रहा है।

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इस कारण संतकबीरनगर की धनघटा तहसील के चार गांव सरैया, भौवापार, गुनवतिया और सुभरहा भी पड़ रहे हैं। जिले में अभी काफी काम बाकी है। लगभग पूरे मार्ग पर फिलहाल मिट्टी डाली जा रही है। जिन जगहों पर पुल बनने हैं, वे भी अभी बन रहे हैं। हालांकि इनका काफी काम पूरा हो गया है। मिट्टी नहीं मिलने की वजह से सड़क बनाने में दिक्कत आ रही है।

एप्को इंफ्राटेक के डिप्टी मैनेजर सुशांत का कहना है कि हरनही से बेलघाट तक करीब 50 घन फीट मिट्टी की आवश्यकता है, जो उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस वजह से मिट्टी वाला काम धीमी गति से चल रहा है। स्थानीय किसान मिट्टी देने के लिए राजी नहीं हैं। नदी के किनारों से मिट्टी निकालकर काम चलाया जा रहा है। वहीं, कंक्रीट से होने वाला कार्य तेजी से चल रहा है।

Farmers not ready to give soil for Link Expressway in gorakhpur
लिंक एक्सप्रेस-वे पर चर्चा करते लोग। - फोटो : अमर उजाला।

किस जिले में कितनी दूरी

  • गोरखपुर में एक्सप्रेस वे 44.5 किमी बनेगा। जैतपुर, सिकरीगंज, खजनी होते हुए बेलघाट निकल जाएगा।
  • संतकबीरनगर जिले में 3.87 किमी दूरी पड़ रही है। धनघटा तहसील के चार गांव दायरे में आ रहे हैं। ये गांव हैं सरैया, भौवापार, गुनवतिया और सुभरहा।
  • आंबेडकरनगर जनपद में 24 किमी दूरी पड़ेगी। भदेनिया, कमरहिया, खंजमपुर होते हुए निकलेगा।
  • आजमगढ़ जनपद में एक्सप्रेस वे 19 किमी लंबा बनेगा। बुहनपुर, अतौलिया, चकिया होते हुए सलारपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में मिल जाएगा।


गोरखपुर में बनेगा औद्योगिक गलियारा
गोरखपुर में लिंक एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। औद्योगिक गलियारा बनने से करीब 30 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

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गर्मी में धूल, बरसात में कीचड़ से परेशानी
गोरखपुर में छपिया इलाके से लिंक एक्सप्रेस-वे निकल रहा है। फिलहाल इस मार्ग पर मिट्टी डालने का काम चल रहा है। छपिया में सुबह से लेकर रात तक मिट्टी ढोने वाली गाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है। इससे खानीपुर, मछली पालन, नगवां, भखरा, भगवानपुर समेत कई गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है। भारी गाड़ियों के गुजरने से रास्ता धूल भरा हो गया। इधर से गुजरने वाले परेशान हो रहे हैं। बारिश में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है। सड़क पर कीचड़ फैल जाता है। ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। गाड़ियां लेकर जाने में दिक्कत होती है। इसी तरह की परेशानी बड़हलगंज इलाके के सरिया तिवारी क्षेत्र के लोगों को भी झेलनी पड़ रही है।

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लिंक एक्सप्रेस-वे। - फोटो : अमर उजाला।

रास्ता डायवर्ट करने से गाड़ियों की आवाजाही भी मुश्किल
बाघागाड़ा से कालेसर फोरलेन के ऊपर छपिया के पास लिंक एक्सप्रेस-वे का ओवरब्रिज बनाया जा रहा है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से छपिया के पास बाघागाड़ा से कालेसर के बीच बैरिकेडिंग कर रास्ता डायवर्ट किया गया है। कुछ दूरी तक बाघागाड़ा से कालेसर की तरफ से आने-जाने वाले वाहनों को एक ही रास्ते से आना-जाना पड़ रहा है। ऐसे में न सिर्फ लोगों को परेशानी होती है, बल्कि फोरलेन पर गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो जाती है।

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छलका कम मुआवजे का दर्द
छपिया इलाके में लिंक एक्सप्रेस-वे अंडरपास के ठीक नीचे चाय की दुकान पर विकास की चर्चा की जा रही थी। स्थानीय निवासी शिवसागर शर्मा ने कहा कि योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद लिंक एक्सप्रेस-वे बनना संभव हो सका है। काफी संख्या में उद्योग भी लग रहे हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अक्षय लाल यादव, सोमई निषाद, मो. कादिर ने शिवसागर की बात से सहमति तो जताई, लेकिन यह भी कहा कि इलाके के किसानों को बहुत कम मुआवजा मिला है। इनका कहना था कि दो लाख रुपये की जगह पचास रुपये देकर किसानों को टरका दिया। किसानों की जमीन भी चली गई और उचित मुआवजा भी नहीं मिला। इससे आगे चलकर किसानों को खासी परेशानी होगी।

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लिंक एक्सप्रेस-वे। - फोटो : अमर उजाला।

लोग बोले
नगवां निवासी रामसेवक ने कहा कि लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण के कारण करीब तीन साल से धूल फांक रहे हैं। फोरलेन से जैसे ही नीचे उतरते हैं, मिट्टी लदी गाड़ियों की आवाजाही से चलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, लिंक एक्सप्रेस-वे से क्षेत्र में औद्योगिक विकास होगा। रोजगार मिलेगा। लेकिन सरकार को लिंक एक्सप्रेस वे के नीचे के गांव खानीपुर की सड़कों के बारे में भी सोचना चाहिए। किसानों को उचित मुआवजा भी देना चाहिए था।

खानीपुर निवासी राज सिंह ने कहा कि आने वाले समय का तो पता नहीं, लेकिन लिंक एक्सप्रेस-वे बनने का स्थानीय लोगों को बहुत फायदा नहीं मिला है। नुकसान ही हुआ है। जहां जमीन की कीमत दो लाख रुपये डिस्मिल थी, वहां मुआवजे के रूप में मात्र 50 हजार रुपये ही मिले हैं। इससे किसानों को काफी नुकसान हो गया है। जिनकी जमीन चली गई है भविष्य में काफी दिक्कत होगी।

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उद्यमी बोले
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि लिंक एक्सप्रेस-वे से उद्यमियों को काफी फायदा मिलेगा। दिल्ली से माल मंगाने से लेकर प्रयागराज, वाराणसी, बलिया समेत पूर्वांचल एक्सप्रेस से जुड़ने वाले शहरों में माल भेजने में न सिर्फ कम समय लगेगा, बल्कि सस्ता भी पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने इस बार के बजट में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ औद्योगिक गलियारा के लिए 200 करोड़ का प्रावधान किया है।

गीडा के उद्यमी आरएन सिंह ने कहा कि उद्यमियों को लिंक एक्सप्रेस-वे के जल्द तैयार होने का इंतजार है। बलिया भी पूर्वांचल के उद्योगों के लिए बड़ा बाजार है, लेकिन अब तक यहां के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं है। लिंक एक्सप्रेस-वे के बन जाने से गोरखपुर के उत्पादों की पहुंच बलिया, वाराणसी तक हो जाएगी। वहीं, लिंक एक्सप्रेस-वे के किनारे लॉजिस्टिक पार्क, टेक्सटाइल पार्क, प्लास्टिक पार्क आदि बनने वाले हैं। इसे औद्योगिक विकास भी होगा।

यूपीडा प्रवक्ता दुर्गेश उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे को जल्द से जल्द पूरा करना प्राथमिकता में है। 62 प्रतिशत काम हो चुका है। घाघरा पुल पर बन रहे 700 मीटर लंबे पुल और डूब क्षेत्र में सड़कों के निर्माण का कार्य चुनौती पूर्ण था, जो अब अंतिम चरण में है। दिसंबर 2023 तक हर हाल में इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

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